डायबिटीज पर पतंजलि का शोध प्रकाशित, योग-आयुर्वेद आधारित समग्र उपचार को मिला वैज्ञानिक समर्थन
हरिद्वार, 21 अप्रैल (हि.स.)। टाइप-1 डायबिटीज़ (टीवनडीएम) के उपचार को लेकर पतंजलि संस्थान द्वारा किया गया शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल फ्रंटियर्स इन क्लिनिकल डायबिटीज़ एंड हेल्थकेयर में प्रकाशित हुआ है। 612 शोध पत्रों के विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन का नेतृत्व पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने किया।
शोध में पाया गया कि केवल इंसुलिन थेरेपी के साथ-साथ योग, प्राणायाम, ध्यान, संतुलित आहार, आयुर्वेद और नेचरोपैथी को अपनाने से शुगर नियंत्रण, तनाव स्तर और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
टाइप-1 डायबिटीज़ एक दीर्घकालिक रोग है, जिसमें अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। विश्व स्तर पर हर वर्ष लगभग 65,000 बच्चों में यह रोग होता है और इसकी दर में करीब 3% वार्षिक वृद्धि हो रही है। शोध को चार प्रमुख आयामों—क्लिनिकल उपचार, योग व वैकल्पिक चिकित्सा, आयुर्वेद आधारित दृष्टिकोण और व्यायाम व ग्लूकोज नियंत्रण—पर परखा गया।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि इंटीग्रेटेड थरेपी आधुनिक और समग्र स्वास्थ्य सेवा की नई दिशा है, जो मधुमेह जैसे जटिल रोगों में सकारात्मक परिणाम दे रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

