हरिद्वार बाघ शिकार मामले में बड़ा एक्शन, रेंजर विनय राठी निलंबित
हरिद्वार, 26 मई (हि.स.)। उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग में सामने आए दो बाघों के शिकार मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए श्यामपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) विनय कुमार राठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि हरिद्वार वन प्रभाग में दो बाघों के शिकार प्रकरण में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल की संस्तुति के बाद उत्तरांचल सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 के तहत रेंजर विनय राठी को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से संबद्ध रखा गया है।
जहर देकर किए गए थे बाघों का शिकार
जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट क्षेत्र में दो बाघों के शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया था। शुरुआती जांच में मामला प्राकृतिक मौत का नहीं बल्कि शिकार का निकला। जांच में सामने आया कि शिकारियों ने बाघों को मारने के लिए जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल किया था। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मृत बाघों के पंजे भी काटकर ले जाए गए थे। इससे संकेत मिले कि शिकार किसी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह द्वारा किया गया हो सकता है। हालांकि अब तक वन विभाग बाघों के पंजे बरामद नहीं कर पाया है।
चार आरोपित गिरफ्तार, कई अब भी फरार
वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक आरोपित को पहले ही जेल भेजा गया था, जबकि बाद में तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। माना जा रहा है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।
बताया जा रहा है कि जांच में क्षेत्रीय निगरानी व्यवस्था, गश्त प्रणाली और खुफिया सूचना तंत्र में गंभीर खामियां सामने आई हैं। इसी के चलते विभाग ने प्राथमिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए रेंजर के खिलाफ कार्रवाई की है।
मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथोरिटी की टीम उत्तराखंड पहुंच सकती है। ऑथोरिटी इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल वन्यजीव शिकार का मामला नहीं, बल्कि बाघ संरक्षण व्यवस्था में बड़ी चूक का संकेत भी है। नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथोरिटी की जांच के बाद कई और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आने वाले दिनों में ऑथोरिटी की जांच और वन विभाग की रिपोर्ट इस मामले में कई बड़े खुलासे कर सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

