ज्येष्ठ पूर्णिमा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का महासागर

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ज्येष्ठ पूर्णिमा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का महासागर


लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी, शहर घंटों जाम से जूझता रहा

हरिद्वार, 31 मई (हि.स.)। धर्मनगरी हरिद्वार में रविवार को अधिक मास की ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। गंगा स्नान के लिए देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान कर पुण्य अर्जित किया। सुबह तड़के से ही स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो दिनभर जारी रही। श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के साथ पूजा-अर्चना और दान-पुण्य कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं देश की खुशहाली की कामना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों और धर्माचार्यों के अनुसार इस दिन गंगा स्नान, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसी कारण उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। हरकी पैड़ी, मालवीय घाट, सुभाष घाट, वीआईपी घाट, प्रेमनगर घाट, कनखल क्षेत्र के घाटों सहित गंगा के विभिन्न तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।

सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही हरकी पैड़ी क्षेत्र में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, भीड़ लगातार बढ़ती चली गई। गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार और जयघोष के बीच स्नान किया। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ विशेष पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे, जबकि बड़ी संख्या में साधु-संत और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी गंगा स्नान में शामिल हुए। हरकी पैड़ी क्षेत्र भोर सवेरे से ही धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। प्रमुख घाटों, पार्किंग स्थलों, प्रवेश मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेटिंग की व्यवस्था की गई थी तथा पुलिसकर्मी लगातार श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों से आवागमन करने के लिए निर्देशित कर रहे थे। गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की भी तैनाती की गई थी ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

हालांकि श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से कहीं अधिक होने के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह दबाव में आ गई। राष्ट्रीय राजमार्ग सहित शहर के प्रमुख मार्गों और आंतरिक सड़कों पर लंबा जाम लग गया। हरिद्वार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग, ज्वालापुर रोड, ऋषिकुल क्षेत्र, भीमगोड़ा, सिंहद्वार, प्रेमनगर आश्रम चौक, चंडी चौक, ललतारौ पुल और कनखल क्षेत्र में कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें देखने को मिलीं। शहर में प्रवेश करने वाले और बाहर जाने वाले दोनों मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। स्थिति ऐसी रही कि सामान्य दिनों में दस से पंद्रह मिनट में तय होने वाला सफर कई स्थानों पर एक से दो घंटे में पूरा हो सका। कई लोग अपने गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच सके।

यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी सड़कों पर डटे रहे। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार यातायात व्यवस्था संभालते देखा गया। कई स्थानों पर यातायात को डायवर्ट कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, लेकिन श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण जाम की समस्या बनी रही। शहर के भीतर पार्किंग स्थलों के भर जाने से भी यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। लोग घंटों की मशक्कत के बाद भी गंगा स्नान के लिए घाटों तक पहुंचते रहे और पूरे श्रद्धाभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते रहे। धर्मनगरी हरिद्वार में ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर उमड़ी इस विशाल भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गंगा और हरकी पैड़ी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है। दिनभर चले स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों के बीच हरिद्वार पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। वहीं प्रशासन के सामने भविष्य में ऐसे बड़े स्नान पर्वों के दौरान भीड़ और यातायात प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने की चुनौती भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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