रिफ्रेशर कोर्स में प्रो. लल पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण पर दिया जोर
नैनीताल, 21 फ़रवरी (हि.स.)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने एमएमटीटीसी द्वारा आयोजित पर्यावरण विभाग के रिफ्रेशर कोर्स में पर्यावरण एवं जैव विविधता विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने रिफ्रेशर कोर्स में विभिन्न राज्यों से आए लगभग 120 प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसके माध्यम से ही पर्यावरण संतुलन सुरक्षित रह सकता है।
प्रो. तिवारी ने बताया कि भारत विश्व के 12 सर्वाधिक जैवविविधता वाले देशों में शामिल है। देश में 25 जैव विविधता के हॉटस्पॉट क्षेत्र हैं, जबकि विश्व में ऐसे 34 प्रमुख हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां स्थानिक प्रजातियों की अधिकता पाई जाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लगभग 4000 आवृतबीजी पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो प्रदेश की जैविक समृद्धि को दर्शाती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जैव विविधता से वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग 26 ट्रिलियन डॉलर की आय होती है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पौधों का पुनर्जनन प्रभावित हो रहा है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है। पर्यावरण और जैव विविधता को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से जीवन में कम से कम 12 पेड़ों के महत्व को समझने और अपने जन्मदिन पर एक पौधा लगाने का आह्वान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

