प्री-बजट परामर्श में उत्तराखंड ने रखीं विकास से जुड़ी प्रमुख मांगें
देहरादून, 10 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पूर्व आयोजित प्री-बजट परामर्श बैठक में केंद्र सरकार के समक्ष कई अहम मांगें रखीं। बैठक में पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों के संतुलित विकास, रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने, आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, पर्यावरण संरक्षण और क्लाइमेट रेजिलिएंस से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के वित्त मंत्रियों की इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से नामित वन मंत्री सुबोध उनियाल ने उत्तराखंड का पक्ष रखा। उन्होंने राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और राष्ट्र को प्रदान की जा रही महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाओं को रेखांकित किया।
उत्तराखंड ने राज्यों के लिए पूंजीगत निवेश सहायता योजना तथा “स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट” को जारी रखने की मांग की। इसके साथ ही सतत पर्यटन के लिए नई केंद्र पोषित योजना, भू-जल संरक्षण हेतु विशेष अनुदान, मानव–वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए क्लस्टर आधारित तारबंदी, स्टेट डेटा सेंटर्स के सुदृढ़ीकरण और ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी परियोजनाओं के सर्वे का प्रस्ताव रखा गया।
राज्य ने जल जीवन मिशन के अनुरक्षण को केंद्र पोषित योजना में शामिल करने, शहरी जल जीवन मिशन के लिए बजटीय प्रावधान, दूरस्थ क्षेत्रों में जल विद्युत परियोजनाओं हेतु वायबिलिटी गैप फंडिंग, आपदा पुनर्निर्माण की पूरी राशि एसडीआरएफ से वहन करने, वृद्धावस्था पेंशन और आंगनवाड़ी मानदेय में वृद्धि तथा आगामी कुंभ आयोजन के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान की भी मांग की।
बैठक में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते राज्यों को करों में उनका हिस्सा समय पर मिल रहा है, जिससे उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में विकास कार्यों को गति मिली है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड देश का “वॉटर टावर” है और राष्ट्र को महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाएं प्रदान करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय बजट 2026–27 राज्य को क्लाइमेट रेजिलिएंट बनाने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में उत्तराखंड की भूमिका को और सशक्त करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार

