गुरु हरगोबिंद साहिब का प्रकाश पर्व श्रद्धा के साथ मनाया
हरिद्वार, 01 जुलाई (हि.स.)। सिक्ख समाज की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त के संस्थापक, बंदी छोड़ दाता, 6 वें गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब का प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कनखल स्थित निर्मल संतपुरा गुरुद्वारे में विशेष दीवान सजाया गया, जहां सैकड़ों की संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे माथा टेका और स्थानीय संगत ने शब्द कीर्तन सुनाकर संगत को निहाल किया। इस अवसर पर संत जगजीत सिंह शास्त्री ने कहा कि शहीदों के सरताज गुरु अर्जुन देव के पुत्र गुरु हरगोबिंद साहिब ने अपने जीवन में चार युद्ध (धर्मयुद्ध) लड़े और फतेह पाई। उन्होंने अकाल तख्त की स्थापना कर लोगों को आध्यात्म से जोड़ा।
वह परमात्मा के रूप थे और उनके पास आलौकिक शक्तियां थीं। उन्होंने मीरी पीरी दो तलवारें रखी जिसका अर्थ बुनियादी और आध्यात्म था। मीरी अत्याचार से लड़ने और पीरी भलाई के लिए थीं। उन्होंने ग्वालियर किले से 52 हिंदू राजाओं को कैद से मुक्त करवाया, जिसके कारण उन्हें बंदी छोड़ दाता भी कहा जाने लगा।
उन्होंने अपना जीवन सेवा, दूसरों की रक्षा, आध्यात्म में व्यतीत किया। इस अवसर पर संत तरलोचन सिंह, ज्ञानी पंकज सिंह, अपनिंदर कौर, कुलदीप सिंह, हरविंदर सिंह भाटिया, सरबजीत कौर, सुरेंद्र सिंह, बीना चितकारिया, सुमन शर्मा, जसप्रीत कौर, बलविंदर कौर, निर्मल सिंह, साहेब सिंह, जसविंदर सिंह, प्रीतम सिंह आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

