मिट्टी के दीये और मूर्तियों को मिल रहा नया स्वरूप, माटीकला से संवरेंगे ग्रामीणों के रोजगार

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मिट्टी के दीये और मूर्तियों को मिल रहा नया स्वरूप, माटीकला से संवरेंगे ग्रामीणों के रोजगार


रुड़की, 03 नवंबर (हि.स.)। भारतीय संस्कृति की पहचान माटीकला को नया स्वरूप देने के साथ स्थानीय कारीगरों को रोजगार से जोड़ने की पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन को धरातल पर उतारने के लिए माटीकला बोर्ड रुड़की द्वारा महिलाओं और पुरुषों को मिट्टी के दीये और आकर्षक मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और रीप परियोजना के सहयोग से यह अभियान चलाया जा रहा है। रुड़की में लिथोप्रेस के समीप स्थानीय महिलाओं और पुरुषों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

माटीकला बोर्ड के उपाध्यक्ष शोभाराम प्रजापति ने बताया कि प्रत्येक दो माह में 25-25 लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। अब तक 50 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षण लेने वालों को दीये बनाने की मशीनें भी दी जा रही हैं, ताकि वे अपना काम शुरू कर नियमित आय कमा सकें।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से वोकल फॉर लोकल अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है। बोर्ड का उद्देश्य कारीगरों को हुनरमंद बनाने के साथ स्वरोजगार के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और पारंपरिक कारीगरी को नई पहचान मिलेगी।

सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि बोर्ड द्वारा तैयार दीये और मूर्तियों को आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है। उत्पादों की गुणवत्ता के साथ पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बाजार में बेहतर पहचान मिले। मिट्टी के दीये हमारी पौराणिक परंपरा का हिस्सा हैं, इन्हें संरक्षित करना जरूरी है। जिलाधिकारी की पहल पर एनआरएलएम और रीप के माध्यम से बोर्ड को सहयोग दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को बाजार मिले और महिलाएं-युवा आत्मनिर्भर बनें।

सीडीओ ने दीपावली पर लोगों से स्थानीय कुम्हारों द्वारा तैयार दीये और मूर्तियां खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद अपनाने से कुम्हार परिवारों को रोजगार मिलेगा और हमारी पारंपरिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

Livevns.news Desk
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