विस के सत्र पर बहाने नहीं, जनमुद्दों पर चर्चा की तैयारी करे कांग्रेस: महेंद्र भट्ट

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विस के सत्र पर बहाने नहीं, जनमुद्दों पर चर्चा की तैयारी करे कांग्रेस: महेंद्र भट्ट


देहरादून, 28 फरवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधानसभा सत्र को लेकर कांग्रेस के लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष को जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की तैयारी करने की सलाह दी है। पार्टी का कहना है कि पिछले चार वर्ष में सदन विपक्षी हंगामों का गवाह रहा है और अब सत्रावधि, बजट प्रस्तुतिकरण या आवाज दबाने जैसे आरोपों की बहानेबाजी नहीं चलेगी।

प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने एक बयान जारी कर कांग्रेस की बयानबाजी को तथ्यहीन करार देते हुए कहा कि यदि बीते चार वर्षों का विधानसभा रिकॉर्ड देखा जाए तो विपक्ष का इतिहास हंगामों और असंवैधानिक आचरण से दागदार रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब कांग्रेस विधायकों को सदन में अवसर मिला, उन्होंने सकारात्मक बहस को बाधित करने का प्रयास किया। चर्चा रोकने में असफल रहने पर कई बार सदन से बहिष्कार कर बाहर चले गए।

भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि जो नेता आज विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगा रहे हैं, वे स्वयं जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने में असफल रहे हैं। उनके अनुसार कांग्रेस विधायकों का ध्यान जनसमस्याओं की गंभीर पैरवी के बजाय मीडिया की सुर्खियां बटोरने पर अधिक रहता है। उन्होंने पिछले सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान कुछ विधायकों के सदन में कंबल ओढ़कर बैठे रहने की तस्वीरें सामने आईं, जिससे संवैधानिक मर्यादाओं को ठेस पहुंची।

प्रदेश अध्यक्ष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस को यदि पांच नहीं, पचास दिन भी मिल जाएं तो भी वह जनहित के मुद्दों पर ठोस चर्चा करने में सक्षम नहीं होगी। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी कार्य कर जनता का विश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और मंशा पर कोई भ्रम नहीं है, जबकि विपक्ष स्वयं भ्रम की स्थिति में रहता है और बहस से बचने के लिए हंगामे का सहारा लेता है।

महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस प्रकार संसद में उसके शीर्ष नेता आचरण करते हैं, वैसी ही परिपाटी उत्तराखंड में अपनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में भी बहस के दौरान अनावश्यक हंगामे और असंवैधानिक भाषा का प्रयोग देखने को मिलता है, जिसका असर राज्यों की राजनीति पर पड़ रहा है।

उन्होंने कांग्रेस को सुझाव दिया कि वह सत्र की अवधि या बजट प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय अपने मुद्दों और प्रश्नों की तैयारी करे। भट्ट ने कहा कि प्रदेश की जनता सजग है और 2027 के विधानसभा चुनाव में फिर से परीक्षक की भूमिका में होगी। यदि कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला तो उसे राजनीतिक रूप से और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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