एसआईआर के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, भ्रम फैला रही कांग्रेस : धामी
देहरादून, 27 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर संवैधानिक संस्थाओं के संबंध में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने रविवार को कहा कि किसी आंतरिक टिप्पणी को निर्वाचन आयोग के अंतिम निर्णय या संस्थागत मतभेद के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के अनुसार एसआईआर से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में पत्रकार वार्ता में कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की पूर्ण आयोग की बैठक हुई थी। बैठक के बाद जारी सूचना को पूरे आयोग की स्वीकृति प्राप्त है। उन्होंने कहा कि 24 जून 2025 को जारी एसआईआर का मूल आदेश सर्वसम्मति से जारी हुआ था। इसके बाद 12 व फिर 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर की समय-सारिणी को भी आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
उन्होंने कहा कि एक समाचार पत्र की रिपोर्ट में निर्वाचन आयुक्तों की ओर से विभिन्न विषयों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है, लेकिन आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि एसआईआर से जुड़े अंतिम आदेश सर्वसम्मति से लिए गए। उन्होंने कहा कि किसी आंतरिक टिप्पणी या आपत्ति को अंतिम संस्थागत निर्णय अथवा संस्थागत मतभेद के रूप में पेश करना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आयोग ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र, फॉर्म-6 और अन्य मुद्दों पर भी स्थिति स्पष्ट की है। उनके अनुसार, एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 से जुड़े घोषणा-पत्र को उच्चतम न्यायालय के निर्णय का आधार प्राप्त है, जबकि गैर-एसआईआर अवधि में निर्वाचन नियम, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य प्रपत्र ही लागू रहेंगे।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम का मिलान नहीं हो पाया है या जिनके विवरण में तार्किक विसंगति है, उनके दस्तावेज बूथ स्तर के अधिकारी घर जाकर प्राप्त करेंगे। सामान्य तौर पर उन्हें कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए सहायता केंद्र एवं विशेष शिविर लगाए जाएंगे। छूटे हुए तथा पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। धामी ने कहा कि ईसीआईनेट को लेकर उठे सवालों पर भी आयोग ने स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की व्यवस्था की है।
धामी ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछे जाने चाहिए, लेकिन किसी आंतरिक टिप्पणी को अंतिम फैसला और किसी आपत्ति को संस्थागत संकट के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। तथ्यों का निर्धारण पूरी फाइल और अंतिम संस्थागत निर्णय से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व पर बैठे व्यक्ति से सार्वजनिक विमर्श में तथ्यों और गंभीरता की अपेक्षा रहती है। उन्होंने कहा कि चुनावी पराजय का कारण कभी ईवीएम और कभी संवैधानिक संस्थाओं को बताने के बजाय कांग्रेस को अपने राजनीतिक और संगठनात्मक प्रदर्शन का आत्ममंथन करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

