उत्तराखंड पर बोलने से पहले तथ्य जानें राहुल गांधी : धामी
देहरादून, 27 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के बयानों को लेकर ने रविवार को तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को उत्तराखंड के बारे में टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जानकारी लेना जरूरी है।
धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल पर लगाए गए आरोप हों या कांग्रेस नेता की दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी, देश की सेवा करने वालों को लेकर कांग्रेस नेताओं की भाषा बार-बार सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तियों और दिवंगत लोगों के प्रति सम्मान एवं संवेदनशीलता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राहुल गांधी कहते हैं एक भी नकल माफिया जेल नहीं गया, जबकि 100 से अधिक आरोपितों पर कार्रवाई हुई और 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली।
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सरकार की प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े संवेदनशील विषय पर राजनीतिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों को देखना चाहिए।
हल्द्वानी प्रकरण का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि किसी घटना को जातीय दृष्टिकोण से देखने से पहले उससे जुड़े तथ्यों की जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक समरसता, भाईचारे और सभी वर्गों के परस्पर सम्मान की रही है। राज्य को जाति और वर्ग के आधार पर बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
जमीन से जुड़े कांग्रेस के आरोपों पर धामी ने कहा कि यदि विपक्ष के पास सरकार अथवा किसी सरकारी संस्था द्वारा नियमों के विरुद्ध जमीन बेचे जाने या दिए जाने का कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि किसी आरोप को बार-बार दोहराने मात्र से वह तथ्य नहीं बन जाता। विपक्ष तथ्यों के साथ अपनी बात रखे, सरकार तथ्यात्मक सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ईवीएम संबंधी बयान पर धामी ने कहा कि रावत का राजनीतिक अनुभव लंबा रहा है और वह उनके स्वस्थ रहने की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी पराजय का ठीकरा कभी ईवीएम तो कभी संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ना उचित नहीं है। धामी ने कांग्रेस के पूर्ववर्ती केंद्र शासन का उल्लेख करते हुए कोयला, कॉमनवेल्थ और 2जी स्पेक्ट्रम घोटालों का भी जिक्र किया।
उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन का उल्लेख करते हुए खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा गोलीकांड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण के पीछे आंदोलनकारियों का संघर्ष और बलिदान जुड़ा है। साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन देशसेवा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के सम्मान को राजनीतिक विवाद से अलग रखा जाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

