पीएम किसान सम्मान निधि: उत्तराखंड के 8.08 लाख किसानों को मिले 161.96 करोड़ रुपये
देहरादून, 30 अक्टूबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत उत्तराखंड के 8 लाख 08 हजार से अधिक किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 161.96 करोड़ रुपये की सम्मान निधि पहुंची।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के हाथीबड़कला स्थित सर्वे ऑडिटोरियम में आयोजित पीएम-किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने प्रदेश के लाभार्थी किसानों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने की महत्वपूर्ण पहल है। वर्ष 2019 में योजना की पहली किस्त जारी होने के समय उत्तराखण्ड के लगभग चार लाख किसान इससे लाभान्वित हुए थे, जबकि अब लाभार्थियों की संख्या बढ़कर आठ लाख से अधिक हो गई है।
उन्होंने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा दी जा रही है। वहीं, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना से मिट्टी की गुणवत्ता के अनुरूप खेती करने में मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में नहरों से सिंचाई पूरी तरह निःशुल्क की गई है और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। करीब 115 करोड़ रुपये के निवेश से राज्य में 350 से अधिक आधुनिक पॉलीहाउस तैयार किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती की चुनौतियों को देखते हुए एक हजार करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखण्ड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा फल उत्पादन और मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट नीतियों के साथ स्टेट मिलेट मिशन शुरू किया गया है। इन योजनाओं के तहत पात्र किसानों को विभिन्न गतिविधियों में 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और फसलों को खराब होने से बचाने के लिए कोल्ड चेन, कोल्ड स्टोरेज, नियंत्रित वातावरण वाले भंडारण केंद्रों और खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। सगंध खेती को बढ़ावा देने के लिए महक क्रांति नीति के तहत सात एरोमा वैली विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही 23 हजार हेक्टेयर भूमि पर सुगंधित पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के माध्यम से प्रदेश के मोटे अनाज और स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने अनुपूरक बजट में धान और गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। पर्वतीय कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, मत्स्य पालन और मौन पालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों की कृषि संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में लैवेंडर और डेंडेलियन जैसी सुगंधित एवं औषधीय फसलों की खेती को भी बढ़ावा दे रही है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने आपदा प्रभावित किसानों को निर्धारित सहायता के अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से भी आर्थिक मदद देने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधायक बृजभूषण गैरोला, उत्तराखण्ड राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चौधरी, राज्यमंत्री प्रताप सिंह पंवार, दायित्वधारी ज्योति कोटिया, सचिव कृषि डॉ. एसएन पाण्डेय, महानिदेशक कृषि एवं उद्यान डॉ. आनन्द श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

