पौड़ी में विधि विधान के साथ संपंन हुआ मोरी मेला

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पौड़ी गढ़वाल, 06 जुलाई (हि.स.)। गगवाड़स्यूं घाटी के तमलाग और कोट ब्लॉक के कुंडी गांवों में आयोजित होने वाला मोरी मेला आज हर्षोल्लास के साथ संपंन हो गया। यह मेला कुंभ और नंदादेवी राजजात की तरह हर 12 साल में एक बार मनाया जाता है और पूरे 6 महीने तक चलता है। मेले में स्थानीय ग्रामीण पांडवों को देवताओं के रूप में पूजते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अपने अज्ञातवास यात्रा के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे। मेला शुरू होने के बाद लगातार छह महीने तक पारंपरिक वेशभूषा में पांडव नृत्य का आयोजन किया जाता है। पिछले 6 महीने से तमलाग गांव के बीच में स्थित भैरव मंदिर के चौक में हर दिन ढोल सागर की थाप पर पांडवों के पश्वा नृत्य करते रहे। मेले की शुरुआत माता कुंती और कालिदास को ससम्मान मंदिर में आमंत्रित कर मंडाण लगाकर होती है। आज मेले के दौरान देवप्रयाग तक पैदल यात्रा, गेंडी वध (प्रतीकात्मक राक्षस वध) और जंगलों से पवित्र पेड़ लाने जैसी कई पारंपरिक रस्में निभाई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह

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