पञ्चमी राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता में मेधावियों का सम्मान, 50 लाख की छात्रवृत्ति वितरित

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पञ्चमी राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता में मेधावियों का सम्मान, 50 लाख की छात्रवृत्ति वितरित


पञ्चमी राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता में मेधावियों का सम्मान, 50 लाख की छात्रवृत्ति वितरित


स्वामी रामदेव ने दिया शास्त्र अध्ययन पर बल

हरिद्वार,02 अगस्त (हि.स.)। भारतीय ज्ञान परम्परा,संस्कृत एवं शास्त्रीय अध्ययन के संरक्षण के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित पञ्चमी राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता 2026-27 का सम्मान समारोह रविवार को सम्पन्न हुआ। समारोह में देशभर के गुरुकुलों, विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों से आए मेधावी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, स्मृति चिन्ह एवं छात्रवृत्तियां प्रदान की गईं। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष लगभग 50 लाख रुपये की छात्रवृत्ति एवं पुरस्कार राशि वितरित की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि आज देश के सामने दो प्रकार के युवा हैं। एक ओर वेद, उपनिषद, गीता, चरक संहिता का अध्ययन कर सनातन परम्परा को आगे बढ़ाने वाले, तो दूसरी ओर अराजकता फैलाने वाले। उन्होंने कहा कि पतंजलि का उद्देश्य युवाओं को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि संस्कार और राष्ट्रभाव से युक्त नागरिक बनाना है। भारत की संस्कृति मर्यादा और संवाद की संस्कृति है।

विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह आहलूवालिया ने पतंजलि के सांस्कृतिक संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शास्त्र अध्ययन चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आधार है।

सम्मानित मेधावी: राष्ट्रीय स्तर पर वेदभानु, साध्वी देववाणी, साध्वी देवांशी, कृष्णाशीष, जाह्नवी, अधिता, राशि, अंजलि, साक्षी, गौरिका को शीर्ष स्थान मिला। संस्थागत वर्ग में दत्तात्रेय, आदर्श, ज्योति, देवार्पणा, ओजस सहित अनेक विद्यार्थी सम्मानित हुए।

प्रतियोगिता में पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि गुरुकुलम, आचार्यकुलम हरिद्वार, राँची, चिरगाँव, कुमारी कटरा एवं देवप्रयाग सहित कई संस्थानों के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया।

इस अवसर पर प्रो.मयंक अग्रवाल, डॉ.ऋत्विक बिसारिया, परीक्षा नियंत्रक ए.के. सिंह, साध्वी डॉ. देवप्रिया सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं गणमान्य उपस्थित रहे। प्रतियोगिता का शुभारम्भ 31 जुलाई को कुलपति आचार्य बालकृष्ण के सानिध्य में हुआ था।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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