पतंजलि का ‘चंदन वन’ मॉडल: पहाड़ों में समृद्धि की नई राह
हरिद्वार, 27 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर भारत में चंदन की खेती को नई दिशा देते हुए पतंजलि ने ‘चंदन वन’ मॉडल विकसित कर एक अनोखी मिसाल पेश की है। लंबे समय तक दक्षिण भारत तक सीमित मानी जाने वाली चंदन खेती अब उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में सफल होती नजर आ रही है।
पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने करीब दो दशक पहले हरिद्वार स्थित औषधीय उद्यान में इस पर प्रयोग शुरू किया। वैज्ञानिक पद्धति से किए गए इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए और धीरे-धीरे यह पहल ‘चंदन वन’ के रूप में विकसित हो गई। इसके बाद कई जिलों के किसानों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया।
इस मॉडल की खास बात यह है कि बंजर भूमि पर भी चंदन जैसे हाई-वैल्यू वृक्ष उगाए जा सकते हैं। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि बीते दिनों यमकेश्वर क्षेत्र में विकसित चंदन की हरियाली को देखकर योगी आदित्यनाथ भी आश्चर्यचकित रह गए।
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार चंदन एक अर्ध-परजीवी वृक्ष है, जिसे वैज्ञानिक तरीके से उगाने पर 10–15 वर्षों में प्रति पेड़ 1 से 1.5 लाख रुपये तक का लाभ मिल सकता है। उनका मानना है कि यह मॉडल पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर पलायन रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

