‘अभ्युदय 2026’ में गूंजा योगधर्म से युगधर्म का संदेश

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‘अभ्युदय 2026’ में गूंजा योगधर्म से युगधर्म का संदेश


हरिद्वार, 21 फ़रवरी (हि.स.)। पतंजलि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक महोत्सव “अभ्युदय 2026” प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का सजीव उदाहरण बनकर उभरा। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “योगधर्म से युगधर्म” रही, जिस पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिन संकल्पों के साथ संस्थान आगे बढ़ रहा है, वे विद्यार्थियों के भीतर साकार हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत विश्वगुरु था, है और रहेगा तथा “चरैवेति-चरैवेति” के मंत्र के साथ देश अपने गौरव को पुनः प्राप्त करेगा।

अध्यक्षता करते हुए परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द मुनि ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय साधना और संस्कारों की अद्वितीय स्थली है। योग केवल लोकप्रियता का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है और यह यात्रा अभी प्रारंभ मात्र है। विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने नाट्य प्रस्तुति की सराहना करते हुए कलाकारों और निर्देशक मंडल को बधाई दी।

मुख्य अतिथि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. श्रीनिवास वरखेड़ी ने प्रस्तुति को नवरसों से परिपूर्ण बताया। विशिष्ट अतिथि संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने कहा कि नाट्य मंचन में सतयुग से कलयुग तक की सांस्कृतिक यात्रा का प्रभावी चित्रण हुआ। कार्यक्रम में महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, साध्वी देवप्रिया, स्वामी एम. लाल महाराज सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पदक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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