पतंजलि में दुनिया का सबसे बड़ा हर्बल आर्ट म्यूजियम

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पतंजलि में दुनिया का सबसे बड़ा हर्बल आर्ट म्यूजियम


-65 हजार से अधिक वनस्पति कलाकृतियां संरक्षित, 300 वर्षों तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था

हरिद्वार, 19 अगस्त (हि.स.)। भारत की आयुर्वेदिक और वनस्पति विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाला अनूठा हर्बल आर्ट म्यूजियम पतंजलि अनुसंधान फाउंडेशन, हरिद्वार में आकार ले चुका है। संग्रहालय में दुनिया भर की औषधीय एवं जैव-विविधता से समृद्ध वनस्पतियों की 65 हजार से अधिक वनस्पति कलाकृतियां संरक्षित की गई हैं। विशाल संग्रह को वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और कलात्मक प्रस्तुति का अद्भुत संगम माना जा रहा है।

30,500 कैनवास चित्र और 35 हजार रेखाचित्र

संग्रहालय में 30,500 हस्तनिर्मित रंगीन कैनवास चित्र तथा करीब 35 हजार रेखाचित्र सुरक्षित रखे गए हैं। इन चित्रों में वनस्पतियों की संरचना, पुष्प, फल, बीज, पत्तियों और अन्य सूक्ष्म विशेषताओं को वैज्ञानिक दृष्टि से उकेरा गया है। दावा है कि विशेष संरक्षण व्यवस्था के कारण ये कलाकृतियां करीब 300 वर्षों तक अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित रह सकेंगी।

1762 स्लाइडर्स और 50 अलमारियों में व्यवस्थित संग्रह

पूरे संग्रह को वर्णानुक्रम में व्यवस्थित किया गया है। रंगीन कैनवास चित्रों को 1762 विशेष स्लाइडर्स में रखा गया है, जबकि रेखाचित्रों को 50 रैक्स वाली विशेष लकड़ी की अलमारियों में संरक्षित किया गया है। इस व्यवस्थित स्वरूप के कारण यह संग्रह शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री बन सकता है।

आचार्य बालकृष्ण के संकल्प से साकार हुआ सपना

इस संग्रहालय की परिकल्पना के पीछे पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण का संकल्प बताया जाता है। कोलकाता प्रवास के दौरान उन्होंने करीब तीन हजार संरक्षित वनस्पति चित्रों का संग्रह देखा था। भारतीय वनस्पतियों के इतने व्यवस्थित दस्तावेजीकरण से प्रेरित होकर उनके मन में भारत में इससे कहीं व्यापक संग्रह तैयार करने का विचार आया। हरिद्वार लौटने के बाद वनस्पति वैज्ञानिकों और कलाकारों की अलग-अलग टीमें गठित की गईं। वर्षों के शोध, मेहनत और कलात्मक साधना के बाद यह विशाल संग्रह आज पतंजलि अनुसंधान फाउंडेशन में साकार हुआ है।

कैनवास पर जीवंत नजर आती हैं वनस्पतियां

संग्रहालय की सबसे खास विशेषता करीब एक मीटर आकार के हस्तनिर्मित कैनवास चित्र हैं। ऐक्रेलिक माध्यम से तैयार इन चित्रों में पौधों की आकृति, रंग, बनावट और सूक्ष्म संरचनाओं को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि पहली नजर में वे वास्तविक पौधों जैसे प्रतीत होते हैं।

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, यह संग्रह 20वीं और 21वीं सदी के समृद्ध वनस्पति कला संग्रहों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है। हालांकि पतंजलि का संग्रह अपने विशाल आकार, विविधता और वैज्ञानिक ढंग से व्यवस्थित कैनवासK चित्रों तथा रेखाचित्रों के कारण अलग पहचान बना रहा है।

शोधार्थियों के लिए वैश्विक ज्ञान केंद्र

यह हर्बल आर्ट म्यूजियम केवल कला का संग्रह नहीं है, बल्कि आयुर्वेद, वनस्पति विज्ञान, जैव-विविधता और प्रकृति संरक्षण से जुड़े अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। एक ही छत के नीचे संरक्षित हजारों कलाकृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की वनस्पति एवं आयुर्वेदिक विरासत का दृश्य दस्तावेज साबित हो सकती हैं।

पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि यह हर्बल आर्ट म्यूजियम केवल चित्रों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की आयुर्वेदिक परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टि और कलात्मक अभिव्यक्ति का अद्वितीय संगम है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान, शोध और प्रकृति संरक्षण की अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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