52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन की तैयारियां तेज
हरिद्वार, 10 अक्टूबर (हि.स.)। पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन को ऐतिहासिक, दिव्य और भव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सम्मेलन की व्यवस्थाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, विभिन्न आयोजन समितियां और स्वयंसेवक समन्वित रूप से जुटे हैं।
इसी क्रम में प्रति-कुलपति साध्वी डॉ. देवप्रिया के नेतृत्व में आयोजित समीक्षा बैठक में तैयारियों की प्रगति का जायजा लिया गया और संबंधित समितियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में सम्मेलन से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने, समितियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और आयोजन की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया गया। अधिकारियों, समिति प्रभारियों और स्वयंसेवकों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, तत्परता और जिम्मेदारी के साथ करने के निर्देश दिए गए।
भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण मंच
साध्वी डॉ. देवप्रिया ने कहा कि अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन भारतीय ज्ञान-परंपरा, प्राचीन शास्त्रों, दर्शन, संस्कृति और प्राच्य विद्याओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ अकादमिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच है। इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी करना पतंजलि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। सम्मेलन देश-विदेश के विद्वानों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और भारतीय ज्ञान-परंपरा के अध्येताओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा। यहां भारतीय मनीषा की समृद्ध विरासत पर गहन चिंतन, मनन और विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा।
सामूहिक प्रयास से सफल होगा आयोजन
साध्वी डॉ. देवप्रिया ने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता सामूहिक प्रयास, अनुशासन, समर्पण और सूक्ष्म योजना पर निर्भर करती है। इसलिए सभी अधिकारी, समिति प्रभारी और स्वयंसेवक सेवा-भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने तैयारियों के प्रत्येक चरण की नियमित समीक्षा करने और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए, ताकि सम्मेलन में आने वाले अतिथियों और प्रतिभागियों को उत्कृष्ट, सुव्यवस्थित एवं ज्ञानवर्धक अनुभव मिल सके।
बैठक में प्रतिभागियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने पर विशेष बल दिया गया। सभी समितियों को आपसी सहयोग और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
उल्लेखनीय है कि 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य, संस्कृति और प्राचीन विद्याओं की प्रासंगिकता को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर प्रदान करेगा। पतंजलि विश्वविद्यालय इस आयोजन को भारतीय ज्ञान-परंपरा की गरिमा के अनुरूप सफल बनाने के लिए प्रयासरत है। सम्मेलन को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल है और आयोजन समितियां तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

