पहाड़ लौटे युवा, खेती बनी कमाई का जरिया : बागेश्वर में रिवर्स माइग्रेशन की नई कहानी
बागेश्वर, 25 अप्रैल (हि. स.)। पहाड़ों से शहरों की ओर पलायन की कहानी अब बदलती नजर आ रही है। जनपद में आधुनिक और औषधीय खेती ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अपनाकर अच्छी आय के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।
जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े की पहल पर कृषि, उद्यान और मत्स्य विभाग की योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है। किसानों को 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान पर पॉलीहाउस, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण मिल रहा है, जिससे खेती अब लाभ का सौदा बनती जा रही है।
सलीगांव के मनोज कोरंगा ने खेती को आधुनिक रूप देते हुए पॉलीहाउस, मछली पालन और खाद्य प्रसंस्करण को जोड़ा। आज वे सालाना 3-4 लाख रुपये कमा रहे हैं और गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। गरुड़ ब्लॉक के चंद्रशेखर पांडे ने औषधीय खेती में नई राह बनाई है। तुलसी, लेमनग्रास और अश्वगंधा जैसे उत्पाद ‘हिम नेचुरल’ ब्रांड से बेचकर वे 7-8 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं।
वहीं किसान दान सिंह ने ‘आत्मा योजना’ और ‘आरकेवीवाई’ के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर वर्मी कंपोस्ट, लाइन बुवाई और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग शुरू किया है। इससे उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जबकि लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
मन्यूड़ा गांव की हंसी शाह ने 38 नाली भूमि पर वैज्ञानिक खेती अपनाकर मोटे अनाज और सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है। कृषि विभाग से 80 प्रतिशत अनुदान पर उपकरण मिलने के बाद उनकी आय 4 से 5 लाख रुपये सालाना तक पहुंच गई है। वे 40 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ रही हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिल रही है।
कीवी और जड़ी-बूटी खेती से आर्थिक उछाल
बागेश्वर में कीवी उत्पादन तेजी से उभरता क्षेत्र बन गया है। वर्ष 2022-23 से पहले जहां इसका क्षेत्रफल 5-8 हेक्टेयर था, वह अब बढ़कर करीब 80 हेक्टेयर हो गया है। उत्पादन 100-110 क्विंटल से बढ़कर 1100 क्विंटल से अधिक पहुंच गया है। इस क्षेत्र से जुड़े किसानों की संख्या 50 से बढ़कर 350 से अधिक हो चुकी है, जिससे कुल आय 13-14 लाख रुपये से बढ़कर 1.5 से 1.7 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा ‘कुटकी’ जैसी जड़ी-बूटी की खेती 46 हेक्टेयर क्षेत्र में 350 महिलाओं द्वारा की जा रही है, जिससे लगभग 70 लाख रुपये की आय अर्जित हो रही है।
जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े ने कहा कि बागेश्वर में आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने यह साबित कर दिया है कि अगर संसाधन और मार्गदर्शन मिले तो पहाड़ों में भी बेहतर भविष्य संभव है। यह बदलाव न सिर्फ पलायन को रोक रहा है, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मजबूत कदम साबित हो रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

