सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देगा नया शिक्षा प्राधिकरण : पुष्कर सिंह धामी

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सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देगा नया शिक्षा प्राधिकरण : पुष्कर सिंह धामी


सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देगा नया शिक्षा प्राधिकरण : पुष्कर सिंह धामी


सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देगा नया शिक्षा प्राधिकरण : पुष्कर सिंह धामी


-उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ,मदरसा बोर्ड समाप्त कर नई व्यवस्था लागू

देहरादून, 01 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ करते हुए कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगा। राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए बुधवार से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत कर दी। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू कर दी गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में प्राधिकरण का शुभारंभ किया और विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र और विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें वितरित कीं।

श्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह केवल नई संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार चाहती है कि राज्य का प्रत्येक विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास से जुड़कर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाला राज्य है और सरकार इसे शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नवाचार का युग है। ऐसे में विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित, कंप्यूटर शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा भी प्राप्त करें।

श्री धामी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप राज्य में शिक्षा को कौशल, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देकर युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का भी प्रमुख माध्यम बनेगा। उन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों से ज्ञानवान, संस्कारित और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करने की अपेक्षा व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नई व्यवस्था से हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा और उत्तराखंड समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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