उत्तराखंड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल अब दूसरे राज्यों में भी बना रहा पहचान
-यूएलएमएमसी को पहली बार तकनीकी सेवाओं से मिली 4.21 लाख की राजस्व प्राप्ति
देहरादून, 19 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड में भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित तकनीकी विशेषज्ञता अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी अपनी उपयोगिता साबित कर रही है। उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केन्द्र (यूएलएमएमसी) को उत्तर प्रदेश की खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए तैयार की गई डीपीआर और उपलब्ध कराई गई तकनीकी परामर्श सेवाओं के एवज में 4.21 लाख रुपये की पहली राजस्व प्राप्ति हुई है। केन्द्र की स्थापना के बाद तकनीकी सेवाओं से अर्जित यह पहली राजस्व राशि है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बादशाही बाग क्षेत्र में स्थित खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के भवन परिसर के समीप भूस्खलन की सक्रियता बढ़ने से परियोजना की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था। समस्या के तकनीकी समाधान और आवश्यक सुरक्षात्मक कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने यूएलएमएमसी से संपर्क किया। निगम ने केन्द्र को भूस्खलन रोकथाम कार्यों की डीपीआर तैयार करने के साथ ही निर्माण कार्य के तकनीकी पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी।
केन्द्र की तकनीकी टीम ने जनवरी 2025 में परियोजना स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। स्थल की भौगोलिक एवं तकनीकी परिस्थितियों के अध्ययन, आवश्यक जांच और विश्लेषण के आधार पर डीपीआर तैयार की गई। निदेशक डॉ.शांतनु सरकार के मार्गदर्शन में टीम ने डीपीआर तैयार करने से लेकर साइट सुपरविजन और अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए। सहायक अभियंता कौस्तुभ बड़थ्वाल समेत तकनीकी दल ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केन्द्र की तकनीकी संस्तुतियों के आधार पर भूस्खलन रोकथाम के निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में हैं।
19 अगस्त 2026 को उपलब्धि का महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया,जब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से डीपीआर एवं तकनीकी सेवाओं के लिए 4.21 लाख रुपये का चेक सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास और महानिदेशक,यूएलएमएमसी को सौंपा गया।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यूएलएमएमसी भूस्खलन जोखिम कम करने से जुड़े विभिन्न तकनीकी कार्यों में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। केन्द्र की ओर से डीपीआर तैयार करने, परियोजना प्रबंधन परामर्श,भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के तकनीकी निरीक्षण और भू-वैज्ञानिक,भू-भौतिकीय और भू-तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं। इसके लिए केन्द्र में विशेषज्ञ तकनीकी मानव संसाधन के साथ आधुनिक उपकरणों की सुविधा भी उपलब्ध है।
केन्द्र की ओर से अब तक सिंचाई विभाग,लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों के लिए आठ से अधिक महत्वपूर्ण डीपीआर तैयार की जा चुकी हैं। खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए मिली पहली राजस्व प्राप्ति को केन्द्र की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

