अर्द्धकुंभ को कुंभ बताने पर कोर्ट जाएंगे अच्यूतानंद, शास्त्रीय परंपरा पालन की अपील

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अर्द्धकुंभ को कुंभ बताने पर कोर्ट जाएंगे अच्यूतानंद, शास्त्रीय परंपरा पालन की अपील


हरिद्वार, 27 जून (हि.स.)। भूमा निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ ने शासन, प्रशासन, अखाड़ों और सनातन धर्मावलंबियों से हरिद्वार अर्द्धकुंभ मेले को शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप अर्द्धकुंभ के रूप में ही आयोजित करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि शासन और मेला प्रशासन अर्द्धकुंभ के स्थान पर कुंभ की अधिसूचना जारी करता है तो इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

पत्रकारों से बातचीत में स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ ने कहा कि अर्द्धकुंभ मेले का कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है। उन्होंने बताया कि तीर्थों की मर्यादा और संतों के बीच विचार-विमर्श की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए राजा हर्षवर्द्धन ने प्रयागराज और हरिद्वार में अर्द्धकुंभ आयोजित करने की परंपरा शुरू की थी।

उन्होंने कहा कि अर्द्धकुंभ में शाही स्नान या अमृत स्नान का भी कोई शास्त्रीय महत्व नहीं है। शास्त्रों में केवल अमृत स्नान का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कुंभ पर्व के ज्योतिषीय आधार का उल्लेख करते हुए बताया कि हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में कुंभ का आयोजन विशेष ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार होता है।

स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ ने कहा कि सभी धर्म अपने प्रमुख पर्व प्राचीन परंपराओं के अनुसार मनाते हैं, इसलिए सनातन धर्मावलंबियों को भी कुंभ और अर्द्धकुंभ की मूल परंपराओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस विषय में शासन-प्रशासन को पत्र भेजा गया है और अखाड़ों से भी चर्चा की जाएगी।

राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिरों में आने वाला दान श्रद्धालुओं की आस्था और समर्पण का प्रतीक होता है, इसलिए उसके उपयोग में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, तिरुपति बालाजी, सिद्धिविनायक और रामेश्वरम जैसे प्रमुख मंदिरों में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे दानराशि का सदुपयोग सुनिश्चित हो और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं श्री गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने कहा कि कुंभ एक शास्त्रीय धार्मिक परंपरा है और शासन, सरकार या किसी भी व्यक्ति को शास्त्रीय मान्यताओं के विपरीत नई परंपरा शुरू करने का अधिकार नहीं है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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