अर्द्धकुंभ के तीन अस्थायी पुलों पर 9.03 करोड़ का बजट

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अर्द्धकुंभ के तीन अस्थायी पुलों पर 9.03 करोड़ का बजट


हरिद्वार, 08 नवंबर (हि.स.)।अर्द्धकुंभ-2027 की तैयारियों में हरकी पैड़ी पर बनने वाले तीन अस्थायी पुलों के नाम पर बजट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। तीनों पुलों की स्थापना, मरम्मत, रखरखाव और मेला समाप्त होने के बाद हटाने के लिए 7.31 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके बाद इन्हीं पुलों के पिलर की मरम्मत के लिए 33 लाख और अस्थायी रैंप निर्माण के लिए 1.39 करोड़ रुपये की अलग-अलग स्वीकृति दी गई है। इस तरह तीन अस्थायी पुलों पर कुल 9.03 करोड़ रुपये खर्च होने की योजना है।

सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि इन पुलों के पिलर का निर्माण वर्ष 2004 में ही किया गया था। पुलों में इस्तेमाल होने वाले गार्डर और अन्य सामग्री भी पहले से उपलब्ध है, जिसका हर कुंभ-अर्धकुंभ में इस्तेमाल होता है और मेला समाप्त होने के बाद उसे लालजीवाला स्थित स्टोर में सुरक्षित रख दिया जाता है। ऐसे में जब पिलर पहले से मौजूद हैं और मुख्य सामग्री भी उपलब्ध है, तो 7.31 करोड़ रुपये किन कार्यों पर खर्च होंगे, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विभाग के अनुसार, 14 अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश में 7.31 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके बाद 27 मार्च 2026 को पिलरों की मरम्मत के लिए 33 लाख और रैंप निर्माण के लिए 1.39 करोड़ रुपये अलग से मंजूर किए गए।

वहीं, सोशल मीडिया पर एक ही कार्य के लिए बार-बार धन स्वीकृत करने के आरोपों पर अवस्थापना खंड रुड़की के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि तीनों शासनादेश अलग-अलग तकनीकी प्रकृति के कार्यों के लिए हैं, इसमें कोई दोहराव नहीं है।

उन्होंने बताया कि 7.31 करोड़ का कार्य मैकेनिकल प्रकृति का है, जिसमें पुलों को स्टोर से लाना, स्थापित करना, चेकर्ड प्लेट व राफ्टर बदलना, मरम्मत, पेंटिंग और मेला समाप्त होने के बाद डिस्मेंटल कर स्टोर में रखने के साथ पांच वर्ष तक सुरक्षा शामिल है। रैंप निर्माण सिविल कार्य है, जो नहर बंदी के बाद किया जाना है। पियर्स की मरम्मत पिछले नहर क्लोजर के दौरान सामने आई तकनीकी आवश्यकता के आधार पर कराई जा रही है।

अधिशासी अभियंता ने कहा कि अस्थायी पुल 12 साल में एक बार लगाए जाते हैं। इस बार लगाए जा रहे पुलों को 2033 के कुंभ के बाद हटाया जाएगा। 2016 में लगे पुलों को 2021 के बाद हटाया गया था।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

Livevns.news Desk
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