तीन दिवसीय कत्थक कार्यशाला, कनखल में गूंजे घुंघरुओं के स्वर
हरिद्वार, 30 अप्रैल (हि.स.)। पौराणिक नगरी कनखल एक बार फिर शास्त्रीय कला की सुरमयी ध्वनियों से सराबोर हो उठी, जब एब्सट्रैक्ट डिवाइन डांस अकादमी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गहन कत्थक कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। अकादमी की संस्थापक एवं प्रसिद्ध कत्थक गुरु माधवी भट्टाचार्य के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला ने लखनऊ घराने की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में पद्म विभूषण पं. बिरजू महाराज के शिष्य शंकी सिंह और स्नेह कुमार ने विद्यार्थियों को कत्थक की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। तीन दिनों तक चले इस शिविर में लगभग 50 उत्साही विद्यार्थियों ने भाग लेते हुए शास्त्रीय नृत्य की तकनीकी और भावनात्मक गहराइयों को सीखा।
कार्यक्रम का समापन दक्षेश्वर महादेव मंदिर और राजघाट स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में भव्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जहां नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से सभी का मन मोह लिया। विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कस्तूरी तिलकम वंदना की भावपूर्ण प्रस्तुति दी और तीन ताल में कत्थक के बोल एवं पदचालन का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
वरिष्ठ विद्यार्थियों ने लखनऊ घराने की पहचान ‘अभिनय’ और जटिल ताल चक्रों पर अपनी प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। इसके साथ ही उन्हें ठुमरी की विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
इस अवसर पर संस्था की अध्यक्ष माधवी भट्टाचार्य ने विद्यार्थियों की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ घराने की शुद्धता और परंपरा को बनाए रखने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा महाराज जी की सिखाई बारीकियों को समर्पण के साथ सीखना उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का सशक्त प्रमाण है।
इस अवसर पर डॉ. राधिका नागरथ, डॉ. सुरेखा शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

