नासिक हरिद्वार उज्जैन कुंभ को लेकर जूना अखाड़े की बैठक, नासिक कुंभ में बनेंगे चारों धामों के मंदिर
हरिद्वार, 29 मई(हि. स.)। हरिद्वार, नासिकव उज्जैन में होने वाले कुंभ पर्वों की तैयारी के संदर्भ में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की एक महत्वपूर्ण बैठक अखाड़े के संरक्षक व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
बैठक में नासिक-त्रयंबकेश्वर कुंभ मेले में चार धामों के मंदिर बनाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ। नासिक में हुई इस बैठक की जानकारी देते हुए हरिद्वार में जूना अखाड़े के प्रवक्ता गोपाल रावत ने बताया कि नासिक-त्रयंबकेश्वर कुंभ मेले में चार धामों के मंदिर बनाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास होने परश्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि इन मंदिरों के निर्माण से विश्व भर से कुम्भ में आने वाले भक्तों व युवा पीढ़ी को देश की चारों दिशाओं में स्थापित चारों धामों के मंदिरों, मठों की जानकारी मिलने के साथ सनातन धर्म की विराटता का भी पता चलेगा।
बैठक की अध्यक्षता जूना अखाड़ा के अध्यक्ष-सभापति श्रीमहंत मोहन भारती ने की। बैठक में हरिद्वार नासिक तथा त्रंबकेश्वर में होने वाले कुंभ मेले के दौरान होने वाले निर्माण कार्यों तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर विचार विमर्श कर प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें पार्किंग की समस्या को गंभीर मानते हुए ऐसी व्यवस्था करने पर जोर दिया गया कि भक्तों को वाहन खड़े करने में दिक्कत न हो।
बैठक में विश्व में चल रहे अस्थिरता व युद्ध के दौर को समाप्त कर शांति स्थापित करने के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान करने का प्रस्ताव भी पास किया गया।
चार धामों के मंदिर निर्माण कार्य का पूजन जूना अखाड़े के वरिष्ठ श्रीमहंत प्रेम गिरि , श्रीमहंत उमाशंकर भारती, श्रीमहंत केदार पुरी व श्रीमहंत नारायण गिरि ने किया। गोदावरी पर बन रहे नए घाट का पूजन भी किया गया।
बैठक में उपाध्यक्ष श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, श्रीमहंत आनंदपुरी, सचिव श्रीमहंत रामेश्वरानंद गिरि, सचिव श्रीमहंत आदित्य गिरि , सचिव श्रीमहंत रत्न गिरि , सचिव श्रीमहंत ओम भारती समेत कई संत मौजूद रहे।
प्रवक्ता के अनुसार नासिक, हरिद्वार व उज्जैन कुंभ मेलों को लेकर बैठकों का उद्देश्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व उत्तराखंड की सरकार को संतों के सुझाव देना है, ताकि सरकारें समुचित विकास कार्य करा सकें और तीनों कुंभ अपनी दिव्यता व भव्यता से नया इतिहास रच सकें।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

