जूना अखाड़े की पवित्र छड़ी यात्रा का केदारखंड भ्रमण पूर्ण
हरिद्वार, 22 अक्टूबर (हि.स.)। सनातन वैभव को पुनर्जागृत करने के संकल्प के साथ प्रारंभ हुई श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की पवित्र छड़ी यात्रा ने प्रथम चरण को उत्साह पूर्वक पूर्ण कर लिया है। 70 संतों के जत्थे ने गुरुवार को भू-बैकुंठ बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल की पूजा-अर्चना के साथ प्रथम चरण का समापन किया।
यह अलौकिक यात्रा 14 अक्टूबर को हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी माँ माया देवी के दरबार से प्रारंभ हुई थी।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्री महंत हरि गिरि जी महाराज के पावन निर्देशन में यात्रा को जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज, श्री महंत हरि गिरि और वरिष्ठ सभापति श्री महंत प्रेम गिरि जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रवाना किया था। इस अवसर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका और अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती भी मौजूद रहे।
जूना अखाड़ा के प्रवक्ता गोपाल रावत द्वारा गुरुवार को हरिद्वार में जारी विज्ञप्ति के अनुसार यात्रा का नेतृत्व हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्री वीरेन्द्रानंद गिरि जी महाराज कर रहे हैं, जिनके साथ महंत पुष्कर गिरि, पशुपति गिरि, आकाश गिरि, राहुल गिरि सहित लगभग 70 नागा संन्यासियों का जत्था हर-हर महादेव के जयघोष के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रथम चरण में संत मंडली ने चार धामों के साथ उन उपेक्षित तीर्थों को भी नमन किया जो विस्मृत होते जा रहे हैं।
लाखामंडल, यमुनोत्री-गंगोत्री, केदारनाथ-बद्रीनाथ, विश्वनाथ मंदिर, सीतामढ़ी, धारी देवी, कोटेश्वर, त्रियुगीनारायण, गुप्तकाशी, तुंगनाथ, जोशीमठ नरसिंह मंदिर और भविष्य बद्री तक धर्म ध्वजा फहराई गई।
अब द्वितीय चरण में यह यात्रा कुमाऊं के मानसखंड की ओर प्रस्थान करेगी। इसमें जागेश्वर, पाताल भुवनेश्वर, मायावती आश्रम होते हुए आदि कैलाश और ओम पर्वत तक संत जाएंगे।
महंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि यह यात्रा उत्तराखंड की आत्मा को जगाने का अभियान है। उद्देश्य उपेक्षित तीर्थों का जीर्णोद्धार, पर्यटन से रोजगार बढ़ाना, पलायन रोकना और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क जैसी सुविधाओं पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

