विचारों की शुद्धता ही विज्ञान का मूल आधार: यादव
हरिद्वार, 24 अगस्त (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग की ओर से फार्मास्यूटिकल साइंस, हेल्थकेयर, बायोटेक्नोलॉजी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए आयाम विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ विश्वविद्यालय सभागार में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। प्रतिभागियों ने वंदे मातरम् की प्रस्तुति भी दी।
मुख्य अतिथि विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही एवं पद्मश्री संतोष यादव ने कहा कि मानवता का आधार आध्यात्मिक है और आध्यात्मिक दृष्टि से ही प्रकृति को सही भाव में समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक हित में किया गया प्रत्येक कार्य राष्ट्र और समाज के लिए कल्याणकारी हो, यह जरूरी नहीं है। विचारों की शुद्धता के बिना व्यक्ति स्वस्थ नहीं रह सकता। इसलिए विचारों का शुद्ध होना ही विज्ञान का मूल आधार है।
संतोष यादव ने जीवन में पंचतत्वों की महत्ता बताते हुए कहा कि आकाश को आधार मानकर वायु से ध्वनि और ध्वनि से शब्द बनते हैं तथा शब्दों से विचारों का निर्माण होता है। उन्होंने प्रकृति और आध्यात्मिकता को मानव जीवन का आधार बताते हुए प्रकृति के संरक्षण और उसके साथ जुड़ाव पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पूर्व स्नातक रणवीर आर्य ने कहा कि आयुर्वेद के बिना मानव स्वास्थ्य की संकल्पना अधूरी है। भारतीय संस्कृति और प्राचीन ग्रंथों में ऋषि-मुनियों के प्रकृति के निकट जीवन तथा औषधीय संपदा के उपयोग का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान परंपरा ने स्वस्थ जीवन के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सम्मेलन के संयोजक प्रो. सत्येंद्र राजपूत ने दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि फार्मास्यूटिकल साइंस औषधियों के माध्यम से रोगों के उपचार और स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि तकनीकी ज्ञान, नवाचार और शोध नई चुनौतियों के समाधान के अवसर उपलब्ध कराते हैं। सम्मेलन में फार्मास्यूटिकल साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
रिसर्च एंड डेवलपमेंट के निदेशक डा. सुहास ने युवाओं से मूल शोध कार्यों के माध्यम से नई तकनीकों के विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्कूल ऑफ मेडिसिन, टेक्सास विश्वविद्यालय के डा. सुभाष चंद्र चौहान, एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा के प्रो. अमरनाथ मिश्रा, अमेरिका से डा. मुरली एम. यल्ल्पू, डा. डाई किम और डा. सीमा खान सहित अन्य विशेषज्ञों ने शोध पत्रों के माध्यम से फार्मास्यूटिकल, हेल्थकेयर, बायोटेक्नोलॉजी और एआई आधारित चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर प्रस्तुतियां दीं।
सम्मेलन के पहले दिन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से आयोजित विभिन्न सत्रों में करीब 200 प्रतिभागियों ने शोध पत्र और पोस्टर प्रस्तुत किए। शोध पत्रों का मूल्यांकन डा. गगन माटा, डा. विनित बिश्नोई सहित विशेषज्ञों की टीम ने किया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत एवं आभार डा. कपिल कुमार गोयल ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रो. एल.पी. पुरोहित, डा. विपिन कुमार, डा. विनोद नौटियाल, डा. अश्वनी कुमार, डा. पीयूष सिंघल, जनसंपर्क अधिकारी डा. शिव कुमार चौहान, डा. प्रिंस, डा. रविंद्र कांबोज, बलवंत सिंह रावत, ओम प्रकाश जोशी, राहुल सिंह, नीरज कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

