शिवाजी महाराज का जीवन राष्ट्रभक्ति, सुशासन और स्वराज का आदर्श : धनंजय

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शिवाजी महाराज का जीवन राष्ट्रभक्ति, सुशासन और स्वराज का आदर्श : धनंजय


शिवाजी महाराज का जीवन राष्ट्रभक्ति, सुशासन और स्वराज का आदर्श : धनंजय


देहरादून, 05 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के देहरादून विभाग प्रचारक धनंजय ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक शासक नहीं, बल्कि स्वराज, सांस्कृतिक अस्मिता और सम्पूर्ण हिन्दू समाज के स्वाभिमान के प्रतीक थे। उन्होंने हिन्दवी स्वराज की स्थापना, धर्म एवं संस्कृति की रक्षा और समाज के आत्मगौरव की पुनर्स्थापना के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।

प्रांत कार्यालय में आज शाम 'हिन्दू साम्राज्य दिवस' के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता धनंजय ने कहा कि शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व निर्माण में राजमाता जीजाबाई की निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने कहा कि जीजाबाई ने शिवाजी को केवल पालन-पोषण ही नहीं दिया, बल्कि राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा, न्यायप्रियता और चरित्र निर्माण के संस्कार भी प्रदान किए। वहीं समर्थ गुरु रामदास के मार्गदर्शन ने उनके नेतृत्व, राष्ट्रदृष्टि और संगठन क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाया।

उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने बाल्यकाल से ही अन्याय का विरोध किया। लगभग 12 वर्ष की आयु में बीजापुर में गौहत्या का विरोध कर उन्होंने निर्भीकता का परिचय दिया। बाद में मुगलशाही और आदिलशाही जैसी शक्तियों का सामना करते हुए उन्होंने अद्वितीय साहस, संगठन क्षमता और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया तथा हिन्दवी स्वराज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।

धनंजय ने अफजल खान प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज ने धैर्य, दूरदर्शिता और रणनीतिक कुशलता से विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने बाजी प्रभु देशपांडे के अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका त्याग भारतीय इतिहास में राष्ट्रनिष्ठा, स्वामीभक्ति और कर्तव्यपरायणता का अमर उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि 'हिन्दू साम्राज्य दिवस' केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक गौरव, स्वाभिमान और संगठन शक्ति को जागृत करने का अवसर है। शिवाजी महाराज का जीवन आज भी युवाओं के लिए राष्ट्रभक्ति, सुशासन, नेतृत्व, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा है। उन्होंने युवाओं से शिवाजी महाराज के आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात कवि श्रीकांत श्री ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख पद्मश्री आर के जैन, रितु गुजराल अधिवक्ता नौटियाल, मधु गुप्ता हरजीत कौर, पंकुल शर्मा, डॉ अभय, विवेक शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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