सोशल मीडिया ने हिंदी के प्रसार को दिया नया मंच, भाषा की शुद्धता और गरिमा बनाए रखना जरूरी

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सोशल मीडिया ने हिंदी के प्रसार को दिया नया मंच, भाषा की शुद्धता और गरिमा बनाए रखना जरूरी


सोशल मीडिया ने हिंदी के प्रसार को दिया नया मंच, भाषा की शुद्धता और गरिमा बनाए रखना जरूरी


हरिद्वार, 14 सितंबर (हि.स.)। हिंदी दिवस के अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से निबंध एवं स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में स्नातक, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के महत्व, समकालीन संदर्भों और डिजिटल माध्यमों में हिंदी के बढ़ते प्रयोग पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

सहायक प्रोफेसर डॉ. अजित तोमर ने कहा कि हिंदी भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विविधता को अभिव्यक्त करने वाली सशक्त भाषा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने हिंदी के प्रसार को नया मंच प्रदान किया है, लेकिन डिजिटल माध्यमों पर भाषा की शुद्धता और गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को हिंदी के प्रति जागरूक करने और इसके प्रयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि हिंदी निरंतर विकसित होने वाली भाषा है। तकनीकी और डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ हिंदी के प्रयोग की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। युवाओं को हिंदी से जोड़ने के लिए आधुनिक तकनीक और नए संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। इस अवसर पर ‘सोशल मीडिया और हिंदी भाषा’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता भी हुई। निर्णायक मंडल द्वारा घोषित परिणामों के अनुसार काव्य पाठ प्रतियोगिता में बीए प्रथम वर्ष के आयुष शर्मा ने प्रथम, शोधार्थी शोभा कुमारी ने द्वितीय तथा बीए प्रथम वर्ष के विवेक कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

वहीं निबंध प्रतियोगिता में शोधार्थी आस्था खंतवाल ने प्रथम, बीए तृतीय वर्ष के कृष जाटव ने द्वितीय तथा बीए प्रथम वर्ष के सागर ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त रूप से संचालन डॉ. रोशन लाल एवं डॉ. मोहनी कुमार ने किया। इस दौरान हिंदी विभाग के शिक्षक, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी तथा शोधार्थी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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