योग और पंचकर्म से असाध्य रोगों का समाधान संभव: कुलपति

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योग और पंचकर्म से असाध्य रोगों का समाधान संभव: कुलपति


हरिद्वार, 22 अप्रैल (हि.स.)। अमृता विश्व विद्यापीठम के जगजीतपुर परिसर में मानव शरीर विज्ञान-मनोविज्ञान परआयोजित 15वीं राष्ट्रीय कार्यशाला योगिक-पंचकर्म चिकित्सा की प्रभावशीलता का शुभारंभ हुआ। पाँच दिवसीय यह कार्यशाला 26 अप्रैल तक चलेगी।

कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि योग और पंचकर्म भारतीय चिकित्सा पद्धति की रीढ़ हैं। आधुनिक विज्ञान के साथ इनके समन्वय से जटिल एवं असाध्य रोगों के उपचार की नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।

यह कार्यशाला निरामया योगम रिसर्च फाउंडेशन, श्री भगवान दास आदर्श संस्कृत पी.जी. कॉलेज के योगिक विज्ञान विभाग तथा अमृता विश्व विद्यापीठम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम माता अमृतानंदमयी देवी अम्मा के आशीर्वाद एवं योग गुरु एम.एम. स्वामी संतोषानंद देव के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है।

आयोजन अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कुमार ने कहा कि योग और पंचकर्म भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं, जो आज वैश्विक स्तर पर शोध का प्रमुख विषय बन चुके हैं। कार्यक्रम की उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. उर्मिला पांडे ने कहा कि अमृता विश्व विद्यापीठम का हरिद्वार परिसर संकल्प से सिद्धि का प्रतीक है। योग और पंचकर्म शरीर को विषमुक्त करने तथा मन को शांत करने की प्रभावी पद्धतियां हैं, जिन्हें दैनिक जीवन में अपनाया जा सकता है।

कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के डॉ. विक्रम सिंह तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. संतोष ने योग चिकित्सा एवं मनोविज्ञान के वैज्ञानिक आधार पर व्याख्यान प्रस्तुत किए।आयोजन सचिव एवं प्राचार्य डॉ. राजतिलक व ब्रह्मचारी प्रमोद कृष्णन ने अतिथियों को स्मृति-चिह्न एवं पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधे भेंट किए।

संयोजक डॉ. अशीमा श्रावण, सह-संयोजक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि उद्घाटन सत्र में डॉ. नितिन कम्बोज, डॉ. अक्षय गौर, डॉ. नरेश सहित अनेक विशेषज्ञ, शोधार्थी, चिकित्सक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला में लगभग 70 प्रतिभागी भाग ले रहे है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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