ज्ञान और विवेक का संतुलन ही सफलता का आधार : सुधांशु त्रिवेदी

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ज्ञान और विवेक का संतुलन ही सफलता का आधार : सुधांशु त्रिवेदी


ज्ञान और विवेक का संतुलन ही सफलता का आधार : सुधांशु त्रिवेदी


-ज्ञान दीक्षा-2026 में जीवन मूल्य, नेतृत्व और नवाचार पर हुआ मंथन

उधम सिंह नगर, 23 मई (हि.स.)। राज्य सभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी शनिवार को ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दौर केवल सूचना एकत्र करने का नहीं, बल्कि ज्ञान को व्यवहार में उतारकर नवाचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं,बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और जीवन मूल्यों का विकास करना भी है।

शनिवार को पंतनगर के जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्विद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नवाचार और जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के लिए शनिवार को ज्ञान दीक्षा-2026 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन किसी भी विद्यार्थी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। यही वह समय है, जब युवा अपने विचार, दृष्टिकोण और व्यक्तित्व को आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय की संस्कृति, अनुशासन और शैक्षणिक परंपरा देशभर में विशिष्ट पहचान रखती है और यहां विद्यार्थियों को केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि टीम भावना, संघर्ष क्षमता और नेतृत्व कौशल भी सिखाए जाते हैं।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि ज्ञान केवल सूचना तक सीमित नहीं होता,बल्कि ‘दीक्षा’ व्यक्ति को जीवन की दिशा और उद्देश्य प्रदान करती है। इसके लिए गुरु, मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसा वातावरण तैयार करने का आह्वान किया, जो सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा दे।

उन्होंने विज्ञान और दर्शन को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि आत्मविकास, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करना भी है। ‘ज्ञान और विवेक’,‘जीवन का विज्ञान एवं दर्शन’,‘अस्तित्व का सार’ और ‘स्वर्ग एवं पृथ्वी’ जैसे विषयों पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी क्षमता और ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में करना चाहिए।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज युवाओं के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन उनका सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी ऊर्जा और समय का सदुपयोग करने, अनुशासन, ईमानदारी और आत्मविश्वास को जीवन का आधार बनाने तथा निरंतर आत्ममूल्यांकन करते रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक चुनौतियों के दौर में युवाओं के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण, परिपक्व सोच और नियमों के प्रति प्रतिबद्धता अत्यंत आवश्यक है। ज्ञान और विवेक का संतुलन ही व्यक्ति को सफल, संवेदनशील और श्रेष्ठ नागरिक बनाता है।

पंतनगर में बिताए क्षण आज भी सबसे अनमोल धरोहर

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि यहां बिताए गए क्षण आज भी उनके जीवन की सबसे अनमोल धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं,बल्कि विचारों के निर्माण, व्यक्तित्व विकास और जीवन की दिशा तय करने का केंद्र होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर सीखते रहने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज का युवा तेजी से बदलती दुनिया में नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए उसमें वैज्ञानिक सोच, शोध की भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास होना अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर कुलपति प्रो.एसके कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ‘ज्ञान दीक्षा-2026’ जैसी पहल विद्यार्थियों को नई प्रेरणा, सकारात्मक सोच और जीवन के प्रति बेहतर दृष्टिकोण प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में नियंत्रक एवं निदेशक प्रशासन, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. आरएस जादोन ने किया, जबकि संचालन डॉ. छाया शुक्ला एवं डॉ. विपिन ध्यानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / विजय आहूजा

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