ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण पर पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू

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ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण पर पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू


पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन में ‘पांडुलिपियों का निवारण एवं संरक्षण’ विषय पर हुई कार्यशाला

हरिद्वार, 12 मई (हि.स.)। केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय की प्रमुख पहल ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत ‘पांडुलिपियों का निवारण एवं संरक्षण’ विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, हरिद्वार में शुरू हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन यज्ञ और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत शॉल, माला और स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया।

कार्यशाला में पांडुलिपियों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण के महत्व पर जोर दिया गया। डॉ. अनुपम श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने ‘फ्लोरा’ और वैज्ञानिक दस्तावेजों के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. राम स्वरूप , उप निदेशक, राष्ट्रीय अभिलेखागार ने पांडुलिपियों के ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व की जानकारी दी। प्रो. अनिर्बान दास, परियोजना निदेशक, ज्ञान भारतम् मिशन ने बताया कि अब तक लगभग 75 लाख पांडुलिपियों का पंजीकरण किया जा चुका है और ए आई तकनीक के माध्यम से 200 पांडुलिपियों को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है।

कार्यशाला में डॉ. वेदप्रिया आर्या, अनुसंधान प्रमुख, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, डॉ. रश्मि मित्तल, इतिहास एवं पुरातात्विक अनुसंधान प्रभाग, और डॉ. ममता मिश्रा, इंटेक संरक्षण संस्थान ने संरक्षण तकनीकों और पारंपरिक ज्ञान पर विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने पतंजलि हर्बल गार्डन और अनुसंधान केंद्र का भ्रमण कर इसके प्रयासों की सराहना की।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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