दैनिक भोजन में स्थानीय व पारंपरिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देंः कीर्ति

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दैनिक भोजन में स्थानीय व पारंपरिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देंः कीर्ति


नई टिहरी, 09 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत जीआईसी रानीचौरी में कृषि विज्ञान केंद्र (केविके) की ओर से पोषण व स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संतुलित, पौष्टिक आहार, स्थानीय व पारंपरिक खाद्य पदार्थों के महत्व, व्यक्तिगत स्वच्छता सहित स्वच्छ पर्यावरण के प्रति जागरूक करना रहा।

बुधवार को रानीचौरी में आयोजित कार्यक्रम में केविके की विशेषज्ञ डॉ. कीर्ति कुमारी ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क के लिए संतुलित व विविधतापूर्ण आहार जरूरी है। अपने दैनिक भोजन में स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। हमारे पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध मंडुवा, झंगोरा, चौलाई, दालें, स्थानीय हरी सब्जियां, मौसमी फल और अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर हैं। इन खाद्य पदार्थों को नियमित आहार का हिस्सा बनाकर न केवल पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती खान-पान की आदतों के प्रति भी सचेत किया।

आजकल बच्चों एवं किशोरों में पैकेज्ड फूड, जंक फूड, अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ व अन्य अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ रहा है। जिसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। प्रधानाचार्य दिवाकर अंथवाल ने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करने के लिए भी प्रेरित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी

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