धर्म शास्त्रों का संदेश सर्वमान्य और सर्वाेपरि : विज्ञानानंद

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धर्म शास्त्रों का संदेश सर्वमान्य और सर्वाेपरि : विज्ञानानंद


हरिद्वार, 08 अप्रैल (हि.स.)।श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म शास्त्रों का संदेश सर्वमान्य और सर्वाेपरि होता है। धर्म से ही कर्मों का निर्धारण होता है और संपूर्ण विश्व में कर्म को ही प्रधान माना जाता है।

श्रीगीता विज्ञान आश्रम में गीता प्रचार सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने धर्म शास्त्रों का सार समझाते हुए कहा कि अभिमान व्यक्ति के पतन का कारण बनता है और अभिमान ही व्यक्ति को युद्ध के लिए अभिप्रेरित करता है। जिससे वह विकास से हटकर विनाश के गर्त में समा जाता है।

भारत को विश्व का सर्वाधिक शांतिप्रिय देश बताते हुए उन्होंने कहा कि सर्वे भवंतु सुखिनः की भावना का सम्मान करने वाला भारत कभी युद्ध का पक्षधर नहीं रहा, क्योंकि भारत शास्त्र सम्मत विचारधारा का अनुयायी है और उसने रामायण तथा महाभारत काल के युद्ध से बहुत कुछ सीखा है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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