पांचवीं गंगा सस्टेनेबिलिटी रन मेंगंगा की निर्मलता के संकल्प के साथ ऋषिकेश में दौड़े धावक

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पांचवीं गंगा सस्टेनेबिलिटी रन मेंगंगा की निर्मलता के संकल्प के साथ ऋषिकेश में दौड़े धावक


ऋषिकेश, 01 नवंबर (हि.स.)। गंगा संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रविवार को ऋषिकेश में पांचवीं ‘गंगा सस्टेनेबिलिटी रन-ऋषिकेश हिमालयाज’ का आयोजन किया गया। ‘स्वच्छ गंगा के लिए दौड़ें, बेहतर कल के लिए दौड़ें’ संदेश के साथ आयोजित इस दौड़ में प्रतिभागियों ने 10, 21, 35 और 50 किलोमीटर की विभिन्न श्रेणियों में हिस्सा लेकर गंगा की निर्मलता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

विवेकानंद यूथ कनेक्ट फाउंडेशन की ओर से परमार्थ निकेतन के सहयोग से आयोजित इस दौड़ का शुभारंभ परमार्थ निकेतन के पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने गंगा बैराज, नीलकंठ रोड स्थित एम्स ऋषिकेश के गेट नंबर एक के सामने से हरी झंडी दिखाकर किया। इसका समापन जानकी सेतु के निकट बीटल्स आश्रम और परमार्थ निकेतन के बीच निर्धारित स्थल पर हुआ।

कार्यक्रम में टीएचडीसी के प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (वित्त) सिपान कुमार गर्ग, ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान, पूर्व महापौर अनीता ममगाईं, उद्योगपति दिलीप लाठी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की जीवनधारा, आध्यात्मिक चेतना और अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं। गंगा का संरक्षण जीवन, संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प है। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन लोगों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराते हैं।

विवेकानंद यूथ कनेक्ट फाउंडेशन के डॉ. राजेश ने कहा कि गंगा सस्टेनेबिलिटी रन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि गंगा के प्रति कृतज्ञता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। गंगा को स्वच्छ और अविरल रखना किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।

हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं, गंगा की जलधारा, जंगलों और झरनों से गुजरने वाले प्राकृतिक मार्ग पर आयोजित इस दौड़ के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रकृति से जुड़ने और जैव विविधता के संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ स्वच्छता, जिम्मेदार जीवनशैली और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है।

समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दौड़ पूरी करने वाले प्रतिभागियों को फिनिशर मेडल देकर सम्मानित किया। आयोजकों ने गंगा की स्वच्छता, हिमालय के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

Livevns.news Desk
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