जेल की चारदीवारी में गूंजे मां गंगा के जयकारे, आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़े बंदी

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जेल की चारदीवारी में गूंजे मां गंगा के जयकारे, आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़े बंदी


हरिद्वार, 03 अगस्त (हि.स.)। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के संयोजन में जिला कारागार में आयोजित गंगा कथा के तीसरे दिन सोमवार को बंदियों ने मां गंगा और भीष्म पितामह के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों का श्रवण किया।

कथाव्यास आचार्य कृष्ण शास्त्री ने मां गंगा और राजा शांतनु के विवाह, वसुओं को मिले श्राप, सात पुत्रों को गंगा में प्रवाहित करने और आठवें पुत्र देवव्रत के भीष्म पितामह बनने की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भीष्म पितामह की आजीवन ब्रह्मचर्य और राज्य त्याग की महान प्रतिज्ञा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि श्रावण मास में मां गंगा की अमृतमयी कथा का श्रवण बंदियों के मन और विचारों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा कि कथा से प्रेरणा लेकर बंदी अपराध का मार्ग छोड़कर समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे।

मुख्य अतिथि निरंजनी अखाड़े के सचिव स्वामी रामरतन गिरि महाराज ने कहा कि मां गंगा की कथा का श्रवण मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है और सत्संग जीवन को सही दिशा दिखाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धर्म और आध्यात्मिकता से जुड़कर ही समाज का वास्तविक कल्याण संभव है।

गरीबदासीय संप्रदायाचार्य स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी हैं। गंगा कथा और सत्संग का श्रवण व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मिक बल और सद्बुद्धि प्रदान करता है।

इस अवसर पर कथा के यजमान जलज कौशिक, सत्यम शर्मा, स्वामी ज्योतिर्मयानंद, स्वामी रुद्रानंद सरस्वती, बृजमोहन शर्मा, बंटी कुमार, चौधरी बलविंदर, पंडित कृष्ण शर्मा और अमित कुमार सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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