दून पुस्तकालय में इरविन एलन सीली की नई पुस्तक ‘फ्लाइंग योगिनीज़’ का लोकार्पण

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दून पुस्तकालय में इरविन एलन सीली की नई पुस्तक ‘फ्लाइंग योगिनीज़’ का लोकार्पण


देहरादून, 16 मई (हि.स.)। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला के अंतर्गत शनिवार को दून पुस्तकालय सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार इरविन एलन सीली की नई पुस्तक ‘फ्लाइंग योगिनीज़’ का लोकार्पण एवं उस पर परिचर्चा आयोजित की गई।

वक्ताओं ने कहा कि ‘फ्लाइंग योगिनीज़’ केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति, सांस्कृतिक स्मृति, आध्यात्मिकता और प्रतिरोध की चेतना पर आधारित गहन वैचारिक यात्रा है। पुस्तक में उन योगिनियों की सांस्कृतिक उपस्थिति और इतिहास को केंद्र में रखा गया है, जिनकी प्राचीन प्रतिमाएँ भारत के मंदिरों से विस्थापित होकर आज विदेशी संग्रहालयों में संरक्षित हैं।

अपने संबोधन में इरविन एलन सीली ने पुस्तक की रचना प्रक्रिया, योगिनी परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रश्नों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि इतिहास और संस्कृति केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि लोक स्मृतियों, मिथकों और कलात्मक अभिव्यक्तियों में भी जीवित रहते हैं।

प्रख्यात कवि, अनुवादक और साहित्य आलोचक अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा ने पुस्तक को भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य की विशिष्ट परंपरा का महत्वपूर्ण विस्तार बताया। उन्होंने कहा कि सीली की लेखन शैली भारतीय अनुभवों को वैश्विक संदर्भों से जोड़ती है और पुस्तक में इतिहास, दर्शन तथा साहित्य का संवेदनशील समन्वय दिखाई देता है।

लेखिका, फिल्मकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता गीता सहगल ने पुस्तक में उपस्थित स्त्री विमर्श और प्रतिरोध की चेतना को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि योगिनियों की अवधारणा केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि स्त्री स्वतंत्रता और आत्म-अभिव्यक्ति का सशक्त रूप है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने भी पुस्तक और उसके विविध विषयों पर प्रश्न पूछे तथा अपने विचार साझा किए। पूरा आयोजन संवाद, विमर्श और साहित्यिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने स्वागत संबोधन से की, जबकि अंत में निकोलस हॉफलैण्ड ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर हिमांशु आहूजा, शांता एन. रविशंकर, अरविन्दर सिंह, नादिर बिलमोरिया, काशी सिंह, इरा सिंह, योगेन्द्र सिंह नेगी, आलोक सरीन, मंजरी मेहता, कुल भूषण, आलोक बी. लाल, विजय भट्ट, ओमप्रकाश जमलोकी और सुंदर सिंह बिष्ट सहित अनेक साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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