पहाड़ के काश्तकार देवताओं के दरबार में, बारिश की प्रार्थना

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पहाड़ के काश्तकार देवताओं के दरबार में, बारिश की प्रार्थना


उत्तरकाशी, 13 जनवरी (हि.स.)। बीते दो महिनों से मौसम विज्ञान की तमाम भविष्यवाणी फेल होने के बाद अब पहाड़ के काश्तकारों की निगाहें अपने आराध्य देवी-देवताओं के दरबार में टिकी है। लोग इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा व हवन कर रहे हैं।

14 जनवरी को मकर संक्रांति पर उत्तरकशी के तमाम देवी देवताओं की देव डोलियां स्नान करेंगी ।

दिसम्बर गुजर चुका है अब जनवरी का महीना बर्फबारी के बिना ही बीत रहा है। गंगोत्री -यमुनोत्री और बद्रीनाथ - केदारनाथ धाम जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के पहाड भी सूखे और बर्फहीन दिख रहे हैं। बर्फबारी और बारिश न होने से हिमालय में हाहाकार मच गया हैं।

तहसील बड़कोट के सरनौल गांव में मां रेणुका मंदिर ट्रस्ट पुजारियों ने बारिश के लिए हवन किया है।

बारिश और बर्फबारी न होने से सेब की फसलों पर संकट है जिले बागवान काश्तकार चिंतित हैं। किसानों को आस बंधी है कि देवी-देवता प्रसन्न होंगे और जल्द बारिश होगी।

बता दें कि जिले में किसानों ने करीब 3500 हेक्टेयर भूमि में मटर व गेहूं की बिजाई की है। बारिश न होने से फसल बर्बाद होने के कगार पर है। पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण किसान बारिश के पानी पर ही निर्भर है। सूखे के कारण क्षेत्र में किसान मटर व गेहूं की फसलें बर्बाद होने से किसानों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। बुधवार से मकर संक्रांति पर देवी-देवता के दरबार में पुजारी बारिश के लिए पूजा करेंगे।

उधर पंचायत के पूर्व प्रधान पुरोला के नेत्री गांव के किसान बलवंत सिंह रावत, सरनौल बलवीर सिंह राणा, सरनौल से प्रमोद सिंह रावत, पोरा गांव के पूर्व प्रधान सुदामा बिजल्वाण, रौन गांव के शिव प्रसाद बिजल्वाण, मणपा कोटी से त्रेपन सिंह चौहान , रवांई एक मंच के चंद्र सिंह रावत समेत अनेक किसानों ने कहा कि अब देवी देवताओं पर आश टिकी है हमारे आराध्य जरूर मेहरबान होंगे और जल्द क्षेत्र में बारिश होगी। किसानों का कहना है कि गेहूं व मटर की बिजाई के लिए उन्होंने काफी पैसा खर्च किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / चिरंजीव सेमवाल

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