उत्तराखंड में ईपीएफओ के सभी दावों का समयबद्ध निस्तारण,'संवेदना' मॉडल पूरे जोन में होगा लागू

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उत्तराखंड में ईपीएफओ के सभी दावों का समयबद्ध निस्तारण,'संवेदना' मॉडल पूरे जोन में होगा लागू


-उत्तराखंड में ईपीएफओ से 9,744 प्रतिष्ठान और 7.74 लाख से अधिक अंशदायी सदस्य जुड़े

देहरादून, 03 जुलाई (हि.स.)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कहा है कि उत्तराखंड में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़े सभी दावों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निस्तारण किया जा रहा है। साथ ही मृत्यु दावों के त्वरित और संवेदनशील निपटारे के लिए देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय में शुरू की गई 'संवेदना' व्यवस्था को अब पूरे जोन में लागू किया जाएगा।

शुक्रवार को ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अजय के. मेहरा ने बताया कि उत्तराखंड में वर्तमान में 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठान तथा 7,74,377 अंशदायी सदस्य पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय कार्यालय हितधारकों को प्रभावी और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सभी दावों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है।

मेहरा ने बताया कि देहरादून कार्यालय में स्थापित 'संवेदना' सेल कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (ईडीएलआई) के तहत प्राप्त मृत्यु दावों के त्वरित, त्रुटिरहित और संवेदनशील निस्तारण के लिए एकल संपर्क केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। इसकी सफलता को देखते हुए इस मॉडल को पूरे जोन में लागू करने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन आधारित योजना (पीएमवीबीआरवाई) की जानकारी देते हुए बताया कि 99,446 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य औपचारिक क्षेत्र में रोजगार बढ़ाना तथा सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार करना है। योजना के तहत दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित होने और लगभग 1.92 करोड़ युवाओं को लाभ मिलने का अनुमान है। यह योजना एक अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होगी।

अजय के. मेहरा ने बताया कि ईपीएफओ ने आंशिक निकासी के नियमों को भी सरल बनाया है। अब सदस्य शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए पांच बार आंशिक निकासी कर सकेंगे। इसके अलावा सभी प्रकार की आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 12 माह कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति निधि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदस्य के अंशदान का 25 प्रतिशत न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने का प्रावधान भी किया गया है।

उन्होंने कहा कि सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सिस्टम (सीआईटीईएस) लागू होने से दावों के निस्तारण और निकासी प्रक्रिया में तेजी आएगी। इससे सेवाएं अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और प्रभावी बनेंगी। साथ ही शिकायतों के समयबद्ध समाधान और पुराने लंबित मामलों के निस्तारण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

मेहरा ने बताया कि देहरादून स्थित वेल्हम बॉयज़ स्कूल से संबंधित ईडीएलआई छूट का वर्षों पुराना मामला भी सुलझा लिया गया है। इस अवसर पर स्कूल की प्राचार्य संगीता कैन को ईडीएलआई एक्सेम्प्शन आदेश सौंपा गया।

प्रेस वार्ता में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 वी.वी.बी. सिंह, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-2 उदित साह एवं मोहम्मद जैद तथा सहायक भविष्य निधि आयुक्त संतोष कुमार और राजेश कुमार भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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