ईवीएम से जुड़े भ्रामक वीडियो पर निर्वाचन सख्त, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

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ईवीएम से जुड़े भ्रामक वीडियो पर निर्वाचन सख्त, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी


देहरादून, 01 अप्रैल (हि.स.)। सोशल मीडिया पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर प्रसारित एक भ्रामक वीडियो के संदर्भ में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी है।

बुधवार को राज्य निर्वाचन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि 'काले कांच के पीछे की काली सच्चाई' शीर्षक से प्रसारित सामग्री तथ्यों पर आधारित नहीं है और इसका उद्देश्य जनसामान्य को भ्रमित करना है। वीडियो में प्रदर्शित मशीन वास्तविक ईवीएम नहीं है,बल्कि एक कूटरचित एवं कृत्रिम उपकरण है, जिसका भारत निर्वाचन आयोग की ओर से उपयोग में लाई जाने वाली ईवीएम से कोई संबंध नहीं है।

निर्वाचन आयोग की ओर से बताया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित उक्त वीडियो में सम्बोधनकर्ता व्यक्ति स्वयं लोकसभा सामान्य निर्वाचन-2024 में 01-टिहरी गढ़वाल संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुका है। इसके बावजूद उसके ओर से ऐसा कोई भी तथ्य अथवा प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया,जिससे यह सिद्ध हो कि किसी मतदाता द्वारा डाले गए वोट के विपरीत वीवीपैट प्रिंट स्लिप में किसी अन्य अभ्यर्थी का नाम या चुनाव चिन्ह प्रदर्शित हुआ हो।

ईवीएम की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों की ओर से मान्यता दी जा चुकी है। प्रत्येक निर्वाचन से पूर्व ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की जाती है,जिसमें मॉक पोल की प्रक्रिया भी शामिल होती है। इसके अतिरिक्त कैंडिडेट सेटिंग के दौरान प्रत्याशियों की मौजूदगी में तथा मतदान प्रारंभ होने से पूर्व पोलिंग एजेंट्स की उपस्थिति में भी मॉक पोल कराया जाता है। यदि किसी मतदाता को वीवीपैट स्लिप को लेकर संदेह हो, तो वह निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के नियम 49एमए के तहत पीठासीन अधिकारी को लिखित आपत्ति प्रस्तुत कर सकता है। अब तक इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

अधिकारियों के अनुसार,वर्ष 2002 से अब तक ईवीएम के संबंध में किसी भी स्तर पर ठोस शिकायत दर्ज नहीं हुई है,जिससे इसकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता स्थापित होती है। निर्वाचन आयोग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें और ऐसे कंटेंट को साझा करने से बचें। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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