एक जुलाई को खत्म होगा मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण संभालेगा जिम्मेदारी

WhatsApp Channel Join Now
एक जुलाई को खत्म होगा मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण संभालेगा जिम्मेदारी


देहरादून, 24 जून (हि.स.)। उत्तराखंड में एक जुलाई से अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के संचालन और मान्यता की नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

उत्तराखंड शासन के एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के अंतर्गत उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को 01 जुलाई से विधिवत रूप से समाप्त किया जा रहा है। इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को समस्त अधिकार एवं दायित्व सौंपे जा रहे हैं। राज्य में वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। नई व्यवस्था के अनुसार इन संस्थानों को पहले उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी होगी और उसके बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी।

नियमावली के तहत मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में मान्यता दी गई है। संस्थानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा और भूमि, वित्तीय स्थिति, स्टाफ की योग्यता और सामाजिक सौहार्द संबंधी मानकों को पूरा करना होगा। मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध होगी।

प्रथम चरण में उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से विधिवत सम्बद्धता प्राप्त करनी होगी, जबकि द्वितीय चरण में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से नई नियमावली के अंतर्गत मान्यता प्राप्त करनी होगी। यह दो-चरणीय प्रक्रिया शैक्षणिक मानकों की निरंतरता एवं संस्थागत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है। संस्थानों को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा तथा आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क जमा करना होगा। यह व्यवस्था पारदर्शिता एवं सुगमता सुनिश्चित करेगी। प्रत्येक मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध होगी। नवीनीकरण के लिए अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन माह पूर्व आवेदन करना अनिवार्य होगा।

आवेदन की समीक्षा में संस्थान की अल्पसंख्यक पहचान, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति, स्टाफ योग्यता एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता का परीक्षण किया जाएगा। प्राधिकरण प्रत्येक आवेदन की समीक्षा करेगा। आवश्यकता होने पर भौतिक निरीक्षण भी किया जा सकेगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् मान्यता निरस्त करने का प्रावधान भी किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और नई व्यवस्था से शैक्षणिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ावा मिलेगा।

समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि पंजीकृत मदरसों को नई व्यवस्था के अंतर्गत लाना एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक सौहार्द को मजबूती मिलेगी।

हालांकि सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की घोषणा की है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार पंजीकृत मदरसों को तत्काल बंद करने के बजाय उन्हें नई मान्यता एवं संबद्धता व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। नई व्यवस्था एक जुलाई से प्रभावी होगी।

क्या है अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों संबंधी मान्यता नियमावली–2026 को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह नियमावली उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम–2025 की धारा 19 के अंतर्गत प्राप्त नियम-निर्माण की शक्ति के आधार पर तैयार की गई है। समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने इस निर्णय को अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक दूरगामी एवं महत्वपूर्ण कदम बताया है।

-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

Share this story