अब टीवी स्क्रीन पर भी दिखेंगे आपदा अलर्ट

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अब टीवी स्क्रीन पर भी दिखेंगे आपदा अलर्ट


-अर्ली वार्निंग सिस्टम को आधुनिक तकनीक से किया जा रहा मजबूत

देहरादून, 25 मई (हि.स.)। उत्तराखंड में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अब डीटीएच प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी आपदा संबंधी अलर्ट प्रसारित किए जाएंगे। राज्य में अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ करने के तहत डीटीएच के जरिए टेस्ट अलर्ट का सफल प्रसारण किया गया। प्रथम चरण में यह परीक्षण देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जनपदों में किया गया।

परीक्षण के दौरान टाटा प्ले, एयरटेल डीटीएच, डी2एच और डिश टीवी जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर टीवी स्क्रीन पर टेस्ट अलर्ट संदेश प्रदर्शित हुआ। यह संदेश लगभग 15 से 40 सेकंड तक स्क्रीन पर दिखाई दिया। इस प्रणाली के माध्यम से आपदा और मौसम संबंधी चेतावनियों का कुछ ही सेकंड में व्यापक स्तर पर प्रसारण संभव हो सकेगा।

नई व्यवस्था के तहत टेलीविजन स्क्रीन पर सीधे संदेश दिखाई देने से लोगों का तत्काल ध्यान आकर्षित होगा। इससे फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और लू जैसी घटनाओं से पहले लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार समय पर अलर्ट मिलने से जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है, इसलिए समय पर चेतावनी का आमजन तक पहुंचना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि डीटीएच आधारित अलर्ट प्रणाली आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र को अधिक व्यापक, त्वरित और प्रभावी बनाएगी।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत कर रही है, ताकि किसी भी आपदा अथवा गंभीर मौसमीय परिस्थिति में समय रहते सटीक सूचना उपलब्ध कराकर जनहानि और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

गौरतलब है कि 2 मई को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सी-डॉट द्वारा उत्तराखंड सहित पूरे देश में सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से अलर्ट भेजने का सफल परीक्षण किया गया था। इस तकनीक के जरिए प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल टावरों की सीमा में आने वाले उपभोक्ताओं को स्वतः अलर्ट प्राप्त होगा। खास बात यह है कि इस प्रणाली के लिए इंटरनेट या किसी मोबाइल ऐप की आवश्यकता नहीं होगी, केवल मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होना जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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