धामी सरकार के चार साल : सशक्त नेतृत्व और समावेशी विकास के साथ सख्त फैसले पर रहा फोकस
देहरादून, 22 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने अपने चार वर्षों के कार्यकाल में राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बना। इसके साथ ह भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी और दंगारोधी कानूनों को लागू कर प्रशासनिक सख्ती बढ़ाई गई। नीतिगत सुधार, कानून-व्यवस्था की मजबूती और रोजगार, स्वरोजगार के साथ महिला सशक्तीकरण के साथ ही समाज के हर वर्ग के सम्मान को प्राथमिकता दी है।
धामी सरकार ने युवाओं के हित में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिससे बीते चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में नियुक्ति मिली। शिक्षा क्षेत्र में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर मदरसा बोर्ड को समाप्त किया गया और पाठ्यक्रम व शिक्षा व्यवस्था को एकीकृत नियामक ढांचे में लाया गया। अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देते हुए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना और स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराकर 2.54 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया। इसके अलावा, सशक्त बहना उत्सव योजना महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने का एक नया मंच प्रदान करती है।
आंदोलनकारियों और सैनिकों के सम्मान के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और पेंशन में वृद्धि की गई। बलिदानी
सैनिकों के आश्रितों को अनुग्रह राशि 50 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ की गई। वहीं, राज्य आंदोलन के दौरान 7 दिन जेल गए अथवा घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन भी 6000 से बढ़ाकर 7000 प्रतिमाह कर दी गई है, जो उनके संघर्ष के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
अग्निवीर योजना के तहत सेवा देने वाले युवाओं को भी सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रदान किया गया। इसके अलावा, राज्य में अग्निवीर योजना के अंतर्गत सेवा देने वाले युवाओं को भी सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है।
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” पहल के तहत 686 शिविर आयोजित किए गए, जिसमें 5.37 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया और 2.96 लाख नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। डिजिटल अपूर्णि पोर्टल के माध्यम से करीब 950 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं। वृद्धावस्था पेंशन, कलाकारों और लेखकों की पेंशन बढ़ाकर समाज के हर वर्ग को लाभ पहुंचाया गया।
शिक्षा क्षेत्र में संस्थागत बदलाव करते हुए उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसके तहत पूर्ववर्ती मदरसा बोर्ड को समाप्त कर एकीकृत नियामक व्यवस्था लागू की गई है। राज्य में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाते हुए 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का दावा किया गया है, जिसे प्रशासनिक कार्रवाई की प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
चार वर्षों में लागू की गई ये नीतियां प्रशासनिक पारदर्शिता, समावेशी विकास और समाज के सभी वर्गों के सम्मान की मिसाल बन चुकी हैं। इन कदमों ने उत्तराखंड को एक सशक्त, संवेदनशील और मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

