आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग तेज

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आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग तेज


हरिद्वार, 15 सितंबर (हि.स.)। आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग तेज हो गई है।

उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित भाजपा राष्ट्रीय कार्यालय में गढ़वाल सांसद एवं राष्ट्रीय मीडिया संयोजक अनिल बलूनी से भेंट कर ज्ञापन सौंपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पौड़ी गढ़वाल जिलाध्यक्ष मनोज जुगरान ने किया।

हरिद्वार जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 सितंबर 2025 को पारित आदेश के बाद आरटीई लागू होने से पूर्व यानी 1 अप्रैल 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने का विषय सामने आया है। आदेश में 55 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को सेवा में बने रहने की राहत दी गई है, लेकिन टीईटी पास न करने पर पदोन्नति से वंचित करने और निर्धारित अवधि में टीईटी पास न करने पर सेवा प्रभावित होने का प्रावधान शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है।

चौहान ने कहा कि आरटीई 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ और एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी की थी। इससे पहले नियुक्त शिक्षक तत्कालीन सरकारी मानकों को पूरा कर सेवा में आए थे। अब 25 से 30 वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों पर टीईटी थोपना व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं है। इस निर्णय का असर उत्तराखंड ही नहीं, देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों पर पड़ेगा।

सांसद अनिल बलूनी ने आश्वासन दिया कि इसे आगामी संसद सत्र में उठाया जाएगा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मिलकर शीघ्र समाधान कराया जाएगा। इस दौरान दीपक सजवाण, राजेंद्र ढौंडियाल और सुमित चौहान मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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