आरटीआई व्यक्तिगत हित के साथ जनहित का भी प्रभावी माध्यम: डॉ. मिश्र
हरिद्वार, 25 सितंबर (हि.स.)। एसएमजेएन पीजी कॉलेज में सूचना का अधिकार अधिनियम के 21 वर्ष पूरे होने पर 'आरटीआई के 21 वर्ष: सुधार या सुदृढ़ कार्यान्वयन' विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि आरटीआई शासन में नागरिक भागीदारी को सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण कानून है।
इसका उपयोग व्यक्तिगत हित के साथ जनहित और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। वर्ष 2009 में राष्ट्रीय आरटीआई पुरस्कार प्राप्त कर चुके डॉ. मिश्र ने विद्यार्थियों की विषय समझ की सराहना की।
प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि आरटीआई ने नागरिकों को सूचना तक पहुंच का कानूनी माध्यम दिया है, लेकिन 21 वर्षों के मूल्यांकन में उपलब्धियों के साथ क्रियान्वयन की चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि व्यवसायी रवि बजाज ने लोकतंत्र में विश्वास और संवाद को जरूरी बताया, वहीं रजनी केयर फाउंडेशन की प्रिया बजाज ने कहा कि आरटीआई ने आम नागरिक को सशक्त किया है।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पारदर्शिता, सशक्तिकरण और जवाबदेही बढ़ने की बात रखी, साथ ही सूचना में देरी और व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी चर्चा की। डिजिटल युग में स्वप्रकाशन को प्रभावी उपाय बताया।
प्रतियोगिता में बीएससी की अंशिका प्रथम, बीए की प्रिन्सी राजपूत द्वितीय और बीएससी की खुशबू मौर्य व बीए की अजरा संयुक्त रूप से तृतीय रहीं। निर्णायक मंडल में डॉ. लता शर्मा, डॉ. सरोज शर्मा और डॉ. मोना शर्मा रहीं। संयोजन राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष विनय थपलियाल ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

