ज्योलीकोट में जलजनित बीमारी से दो मौतें, बीमारी को लेकर बढ़ी चिंता
नैनीताल, 06 सितंबर (हि.स.)। नैनीताल जनपद मुख्यालय के निकटवर्ती हल्द्वानी राजमार्ग के पास स्थित ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी का संकट गंभीर होता जा रहा है। क्षेत्र में उपचार के दौरान एक किशोर और विवाहिता की मौत की जानकारी सामने आई है। सरियाताल निवासी परिवार के इकलौते पुत्र 16 वर्षीय रितेश जीना ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में शनिवार देर शाम दम तोड़ दिया, जबकि ज्योलीकोट निवासी 26 वर्षीय नीमा जोशी की बरेली के राममूर्ति अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई है।
नीमा दो छोटी बच्चियों की मां थीं। उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों के भी पीलिया से पीड़ित होने की जानकारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरियाताल निवासी रितेश जीना को 18 अगस्त से टायफाइड और उल्टी-दस्त की शिकायत थी। परिजनों के अनुसार 28 अगस्त को हालत बिगड़ने पर उसे हल्द्वानी के कई निजी चिकित्सालयों में ले जाया गया। बाद में दिल्ली के लाल बहादुन शास्त्री अस्पताल और एम्स के लिए संदर्भित किया गया, जहां चिकित्सकों ने लीवर प्रत्यारोपण की सलाह दी। रितेश के ताऊ बीएस जीना के अनुसार निजी चिकित्सालयों में उपचार का खर्च एक करोड़ रुपये से अधिक बताया गया।
इतनी बड़ी धनराशि जुटाना परिवार के लिए संभव नहीं था। बाद में रितेश को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। उपचार के दौरान संक्रमण बढ़ने से लीवर के साथ फेफड़े, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने की बात परिजनों ने बताई है। रितेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता उमेश्वर सिंह उद्यान विभाग ज्योलीकोट में उपनल कर्मचारी हैं, जबकि मां इंदिरा देवी गृहणी हैं।
दूसरी घटना में ज्योलीकोट क्षेत्र की 26 वर्षीय नीमा जोशी की मौत हुई है। परिजनों के अनुसार दो सितंबर को तबीयत खराब होने पर उन्हें हल्द्वानी के निजी चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने लीवर संक्रमण और पीलिया बताया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बरेली के श्रीराममूर्ति मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। नीमा के पति नीरज जोशी वन विभाग में अस्थायी श्रमिक हैं। उनकी चार वर्ष और डेढ़ वर्ष की दो बेटियां हैं। परिवार के पांच अन्य सदस्यों के भी पीलिया से पीड़ित होने की जानकारी है।
लगातार डायरिया, उल्टी-दस्त, टायफाइड और अब पीलिया के गंभीर मामले सामने आने से ग्रामीणों में बीमारी के स्रोत और पेयजल की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट के अनुसार क्षेत्र में बीमारी के मामले जून के अंतिम सप्ताह से सामने आ रहे हैं और स्थिति को समय रहते गंभीरता से नियंत्रित किए जाने की आवश्यकता थी। हालांकि उपलब्ध जानकारी में इन दोनों मौतों के लिए किसी एक जल स्रोत को आधिकारिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच और परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि ज्योलीकोट क्षेत्र में अलर्ट जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं और आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी लेने तथा संदिग्ध रोगियों की सूचना तत्काल देने के निर्देश दिए गए हैं। दो मौतों के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध रोगियों की समय पर जांच व उपचार तथा पेयजल स्रोतों और स्वच्छता व्यवस्था की जांच पर जोर दिया जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

