ढोल की थाप और रंगों से सजी दौला की ऐतिहासिक होली
पिथौरागढ़, 03 मार्च (हि.स.)। जनपद मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम दौला की ऐतिहासिक होली इन दिनों हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाई जा रही है। यहां होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि ढोल की थाप, राग-रस और लोक संस्कृति का जीवंत संगम है।
होली का शुभारंभ ग्राम स्थित चटकेशर महादेव मंदिर में टीका लगाकर किया जाता है व समापन भी यहीं पर होता है। इस दौरान होल्यार पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-दमाऊ की मधुर थाप पर खड़ी होली का गायन करते हुए विभिन्न स्थानों—दौला, देवलाल गांव, मरखोलीगांव, देवतोला, रई, सिल्थाम, गांधी चौक, पुरानी बाजार स्थित सीर स्थल एवं जिलाधिकारी निवास—तक पहुंचते हैं।
सरकारी निवास पर जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने होल्यारों का पारंपरिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने जिलाधिकारी को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं प्रेषित कीं। जिलाधिकारी ने भी सभी को रंग लगाकर आपसी सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि विगत लगभग 50 वर्षों से ग्राम दौला की होली परंपरागत रूप से जिलाधिकारी निवास पहुंचती रही है, जो इस ऐतिहासिक पर्व की विशिष्ट पहचान बन चुकी है। होली कमेटी अध्यक्ष चंद्र शेखर नगरकोटी ने बताया कि जहां एक ओर सोर घाटी में बढ़ते शहरीकरण के कारण नई पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति से दूर होती जा रही है, वहीं ग्राम दौला के निवासी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। वे परंपराओं को जीवित रखते हुए युवाओं को भी लोक संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
दौला की यह ऐतिहासिक होली जनपद की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जो आपसी भाईचारे, प्रेम और लोक परंपराओं की सशक्त एवं जीवंत मिसाल प्रस्तुत करती है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

