प्राचीन राम मंदिर में महंत की नियुक्ति पर न्यायालय की रोक, महामंडल काे आपत्ति

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प्राचीन राम मंदिर में महंत की नियुक्ति पर न्यायालय की रोक, महामंडल काे आपत्ति


हरिद्वार, 16 अगस्त (हि.स.)। भोपतवाला स्थित श्री प्राचीन राम मंदिर में 17 अगस्त को प्रस्तावित महंत की नियुक्ति पर सिविल जज जूनियर डिवीजन, हरिद्वार की अदालत ने रोक लगा दी है। यह आदेश पंचपुरीय श्री वैष्णव विरक्त महामंडल, हरिद्वार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर पारित किया गया।

घनश्याम भवन में पत्रकारों को जानकारी देते हुए महामंडल के महासचिव महामंडलेश्वर श्याम दास ने बताया कि वैष्णव आश्रमों एवं मठों के संरक्षण के उद्देश्य से वर्ष 1980 में संस्था का गठन किया गया था। वर्तमान में 40 से अधिक आश्रम संस्था से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि श्री प्राचीन राम मंदिर भी महामंडल से संबद्ध है और वर्तमान महंत रामदास जी महाराज की नियुक्ति भी संस्था के माध्यम से हुई थी।

महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज के अनुसार, वर्तमान महंत रामदास महाराज ने महामंडल को विश्वास में लिए बिना अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की। संस्था की ओर से उनसे महामंडल की सहमति लेने का आग्रह किया गया, लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर संस्था ने न्यायालय की शरण ली। महामंडल के अधिवक्ता के. एल. गुप्ता की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में कहा गया कि संबंधित संपत्ति के महंत एवं प्रबंधक की नियुक्ति महामंडल के अनुमोदन के बिना नहीं की जा सकती। आरोप है कि महंत रामदास शिष्य नारायण दास की ओर से 17 अगस्त 2026 को एक निमंत्रण पत्र जारी किया गया, जिसमें उनके शिष्य बलराम दास को मंदिर का महंत एवं प्रबंधक नियुक्त किए जाने का उल्लेख किया गया था। महामंडल ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नियुक्ति के लिए संस्था से कोई अनुमोदन नहीं लिया गया।

अदालत ने प्रतिवादी की अनुपस्थिति में एकपक्षीय आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया कि प्राचीन श्री राम मंदिर, भोपतवाला, हरिद्वार की संपत्ति के महंत एवं प्रबंधक की नियुक्ति वादी संस्था के अनुमोदन के बिना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न की जाए और न कराई जाए। महामंडल की ओर से न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी पत्र सौंपकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। इस दौरान महामंडल के मंत्री किशनदास महाराज, कोषाध्यक्ष महंत गणेश दास महाराज और महंत प्रेम नारायण दास भी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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