उत्तराखंड में पांच साल में स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर 1700 पार : मुख्यमंत्री

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उत्तराखंड में पांच साल में स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर 1700 पार : मुख्यमंत्री


-संवाद में उद्यमियों, किसानों और नवाचारकर्ताओं से मिले मुख्यमंत्री

देहरादून, 17 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कहा कि राज्य में पिछले पांच वर्षों में स्टार्टअप की संख्या लगभग 700 से बढ़कर 1,700 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा कृषि, तकनीक, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में नवाचार के माध्यम से अपनी पहचान बनाने के साथ ही दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी शनिवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘विकसित उत्तराखंड–यात्रा जारी है’ संवाद कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले उद्यमियों, नवाचारकर्ताओं, प्रगतिशील किसानों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के साथ संवाद कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने नियोजन विभाग और देवभूमि डायलॉग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों के अनुभव और सुझाव सुने और उनके प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में उत्तराखंड आगे बढ़ रहा है। राज्य के समग्र विकास में सरकार के प्रयासों के साथ प्रदेशवासियों की मेहनत, प्रतिभा और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय पर्यटन और ऊर्जा को विकास के प्रमुख आधार के रूप में देखा गया था। इन क्षेत्रों में प्रदेश ने प्रगति की है, लेकिन रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं का अभी और विस्तार किया जा सकता है। ऊर्जा क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है और जलविद्युत उत्पादन की संभावनाओं का लाभ उठाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है। सरकार स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।

संवाद के दौरान चंपावत के राहुल नरियाल ने सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली कार तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी दी। उत्तरकाशी के जयप्रकाश ने बताया कि उन्होंने एक गाय से डेयरी व्यवसाय शुरू किया था। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया और अब उनके पास पांच बद्री तथा आठ देशी गाय हैं।

पौड़ी के नवीन पटवाल ने गुच्छी मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन से रोजगार सृजन के प्रयासों की जानकारी दी। ऊधमसिंह नगर के विकास कुमार शाह ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ स्टार्टअप चला रहे हैं, जिसका कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुका है।

चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी और अन्य हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में काम शुरू करने तथा स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की जानकारी दी। वहीं, नैनीताल की कमला देवी ने बताया कि वह वाहनों के टायरों की मरम्मत का काम कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

चमोली के डॉ. हरपाल नेगी ने बताया कि उन्होंने घेस क्षेत्र में कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती के लिए स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित किया। उनके अनुसार, वर्तमान में 300 से अधिक लोग इस काम से जुड़े हैं और सामूहिक रूप से लगभग डेढ़ से दो करोड़ रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं।

सिंगापुर से वर्चुअल माध्यम से जुड़े टनकपुर निवासी शैलेश ने वहां सीवरेज जल शोधन के क्षेत्र में अपने काम की जानकारी दी। उन्होंने चंपावत के एक गांव को गोद लेकर उसके विकास में सहयोग करने की इच्छा जताई। सोमेश्वर के ललित खाती ने एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से रोजगार सृजन के प्रयासों को साझा किया।

वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं अनीता शर्मा थपलियाल ने ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और देहरादून में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अपने प्रयासों का विस्तार करने की बात कही।

मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत जर्मनी में रोजगार प्राप्त करने वाली टिहरी की सपना राणा ने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग से जर्मन भाषा का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें वहां नर्सिंग के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में पिरूल से उपयोगी उत्पाद बनाने वाली गीता पंत और सुमन पांथरी, बागवानी के क्षेत्र में कार्यरत महाबल नेगी तथा मोटे अनाज से बने उत्पादों की बेकरी संचालित करने वाली कल्पना बिष्ट ने भी अपने अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय उत्पादों और युवाओं की प्रतिभा का उपयोग कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलें, ताकि वे आत्मनिर्भर बनने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकें।___________________

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

Livevns.news Desk
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