मुख्यमंत्री धामी ने 26 मदरसों को प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र , बोले- आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य होगा उज्ज्वल

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मुख्यमंत्री धामी ने 26 मदरसों को प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र , बोले- आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य होगा उज्ज्वल


मुख्यमंत्री धामी ने 26 मदरसों को प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र , बोले- आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य होगा उज्ज्वल


देहरादून, 2 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को आईआरडीटी सभागार में आयोजित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसों) को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम की थीम 'नई पहचान, नया सम्मान—आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य' रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में 26 शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिलना एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन वर्तमान समय ज्ञान-विज्ञान, साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। दुनिया तेजी से बदल रही है और बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान आज पर्याप्त नहीं है। बच्चों को व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक, वैज्ञानिक या किसी अन्य क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। कृषि क्षेत्र में भी आधुनिक तकनीक और शोध को अपनाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उद्देश्य किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतियां और योजनाएं पात्रता के आधार पर सभी वर्गों तक पहुंच रही हैं। सरकार की मंशा समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा, हुनर और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे किसी वर्ग को लक्ष्य बनाकर लागू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी सोच को बदलने की जरूरत है, जिसमें कुछ वर्गों को लंबे समय तक पर्याप्त अवसरों से वंचित रखा गया। शिक्षा और विकास के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर कहा कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। सरकार का उद्देश्य गरीब व्यक्ति को परेशान करना नहीं है। वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री और स्वीकृत मानचित्र के साथ विधिवत खरीदी गई जमीन पर किसी को परेशान करने का सवाल ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि बच्चों में नई तकनीक को सीखने और समझने की क्षमता तेजी से बढ़ रही है। 14-15 वर्ष की उम्र के बच्चे कई ऐसी डिजिटल तकनीकों की जानकारी रखते हैं, जिनसे बड़े लोग भी कई बार अनभिज्ञ होते हैं। ऐसे में उनकी क्षमताओं को सही दिशा देने के साथ अच्छे संस्कार और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है।

धामी ने कहा कि शिक्षा बच्चों के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। समय के साथ शिक्षा और कार्य करने के तौर-तरीकों में भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने अपने किसान परिवार की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीक को अपनाना भी आवश्यक है। यही बात शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होती है।

मुख्यमंत्री ने मान्यता प्राप्त संस्थानों से अपेक्षा की कि आधुनिक शिक्षा का संदेश गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज की पहल केवल प्रमाण-पत्र वितरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक प्रभाव बच्चों की शिक्षा, प्रतिभा और भविष्य में दिखाई देना चाहिए। शिक्षण संस्थानों को केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय धरातल पर बदलाव लाने की दिशा में काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विभिन्न क्षेत्रों में नए प्रयोगों और नीतियों के माध्यम से देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल भी आगे चलकर देश के लिए उदाहरण बनेगी और उत्तराखंड को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की रही है। सरकार ने विश्वास का वातावरण बनाया है और अब शिक्षण संस्थानों तथा समाज की भी जिम्मेदारी है कि इस विश्वास को मजबूत किया जाए।

देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर के कुल 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र दिए गए। इनमें देहरादून के छह, हरिद्वार के 19 और ऊधमसिंहनगर के एक संस्थान शामिल हैं। ऊधमसिंहनगर के केलाखेड़ा स्थित एम.जी.एन. पब्लिक स्कूल को नवीन मान्यता प्रदान की गई।

इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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