हिंदी को विज्ञान और तकनीक की भी भाषा बनाना होगा: मुख्यमंत्री धामी

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हिंदी को विज्ञान और तकनीक की भी भाषा बनाना होगा: मुख्यमंत्री धामी


हिंदी को विज्ञान और तकनीक की भी भाषा बनाना होगा: मुख्यमंत्री धामी


देहरादून, 14 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है। इसे विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल दुनिया की भी मजबूत भाषा बनाना होगा।

इस अवसर मुख्यमंत्री ने साहित्यकारों, लेखकों, भाषाविदों, छात्र-छात्राओं और हिंदी प्रेमियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनकर विविधता में एकता की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।

उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार भी है। जो समाज अपनी भाषा को सहेजता है, वह अपनी संस्कृति और पहचान को भी सुरक्षित रखता है।

धामी ने कहा कि वर्तमान समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे में हिंदी को पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल माध्यमों से जोड़ना होगा। युवाओं को नई तकनीक और अन्य भाषाएं सीखने के साथ हिंदी और मातृभाषा पर गर्व बनाए रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की लोकभाषाओं के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी समेत प्रदेश की लोकभाषाएं और बोलियां राज्य की सांस्कृतिक धरोहर हैं। सरकार हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य और साहित्यकारों के संरक्षण एवं सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के तहत साहित्यकारों को पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है। ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के तहत हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार में 5.51 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाती है। इसके अलावा साहित्य को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने, ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ पहल के जरिए पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने और रचनाकारों को पुस्तक प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान देने का काम किया जा रहा है।

इस अवसर पर साहित्यिक एवं रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं के 126 विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, सचिव भाषा विभाग उमेश नारायण पांडे, निदेशक भाषा मायावती ढकरियाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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